वन विभाग के जिम्मेदारो की लापरवाही से जंगल तबाह कर रही है।पावर ग्रीड कंपनी

पावर प्रोजेक्ट के टावर लगाने के लिए बिना अनुमति के जंगलो मे किए जा रहे धमाको से दहल उठा है। क्षेत्र

नीमच जिले मे केंद्र सरकार के उपक्रम से पावर प्रोजेक्ट की आड़ मे जंगल मे अनैतिक कार्य बिना अनुमति के पावर प्रोजेक्ट कम्पनी के कर्ताधर्ता कर रहें है,नीमच जिले के जावद वन परिक्षेत्र के उपवन परिक्षेत्र ग्वालियर कला के बड़ी घाटी के जंगलो मे पावर ग्रीड कंपनी के द्वारा टावर लगाने के लिए विस्फोट करके खनन किया जा रहा है।जिसकी अनुमति वन विभाग से नहीं ली गई थी, पावर ग्रीड कंपनी नें बिना अनुमति जंगल मे धमाके किये,10 बाय 10 के एरिया मे टावर के पिलर खडे करने के लिए विस्फोट किये। मोके पर बड़ी बड़ी पत्थरो की चट्टानें पड़ी हुई है। जो की इस बात का पुख्ता सबूत है की कितनी मात्रा मे यहाँ विस्फोटक पदार्थ का इस्तेमाल किया गया होगा, क्युकि ये बड़े पत्थर किसी भी मशीन से तो खुदाई करके नहीं निकाले जा सकते है,एक नहीं तीन टावरो को खड़ा करने के लिए अवैध रूप से धमाके किये जिसमे पहला टावर बड़ी घाटी जंगल क्षेत्र मे दूसरा ग्राम रुपपूरा जंगल क्षेत्र मे और तीसरा भी इसके पास ही किया गया है,मगर वन विभाग के कर्ताधर्ताओ नें कंपनी पर कोई कार्यवाही नहीं की ये सब देखकर ऐसा लगता है,जैसे जंगल मे जंगल राज ही चल रहा है,और सबकुछ आपसी सहमति से हुआ है, इसलिये ही वन विभाग आंखे बंद करके पावर कम्पनी को जंगल मे टावर और 400 केवी पावर लाइन की ऑनलाइन अनुमति देकर चैन की नींद सो गया है, अब कम्पनी अपनी मन मानी जंगल मे कर रही है,हरे भरे वृक्षो को काट कर पर्यावरण का नुकसान तो कर ही रही है,इसके साथ ही अवैध रुप से धमाके कर रही है,अब इस धमाके से जंगल को कितना नुकसान पंहुचा है,ये तो जाँच होंगी तब ही पता चलेगा,मगर जो भी हो इस पावर प्रोजेक्ट नें जंगल की बली तो ले ही ली है,जबकि इस प्रोजेक्ट से मध्यप्रदेश के इस क्षेत्रीय इलाके को कोई फायदा भी नहीं मिल रहा है और उलटा जंगल का नुकसान हो रहा है, क्युकि ये लाइन राजस्थान मे जा रही है। और प्रोजेक्ट के लिए जंगल को निशाना बनाया जा रहा है,हमारे कुछ सूत्रों नें बताया की इस प्रोजेक्ट के अलावा एक और प्रोजेक्ट इसी जंगल से निकालने की तैयारी की जा रही है,और बताया जा रहा है,की ये प्रोजेक्ट भी बहुत बड़ा नुकसान जंगल को पहुचायेंग़ा। इस प्रोजेक्ट के लिए जंगल का सर्वे हो चूका है,इसका मतलब साफ है,की एक प्रोजेक्ट तो जंगल को निगल रहा है,अब दूसरा प्रोजेक्ट भी जंगल तबाह करने की तैयारी मे है। मतलब जंगल का सूपड़ा ही साफ करने मे सरकार आमादा हो गई है,ऐसी भी सरकार की क्या मज़बूरी है। की कुछ उद्योगपतियो के लाभ के लिए ये जंगल की बली चढ़ा रहें है,क्या ये प्रोजेक्ट बिना जंगल काटे भी दूसरे विकल्प से पुरे नहीं किये जा सकते है, करोड़ो रूपये की लागत के ये प्रोजेक्ट है, इसका फायदा भी उद्योगपति उठा रहें है,मगर इलाके के ग्रामीण जिन्होंने वर्षो से जंगल को सहेज रखा है,वो मुँह ताक के जंगल की बर्बादी देख़ रहें है,यहाँ के लोगो को केन्द्र सरकार का प्रोजेक्ट है,ये बोलकर इनका मुँह बंद करवा दिया जाता है,किसानो की जमीन भी महज चंद रूपये का मुआवजा देकर छीनी जा रही है,जहाँ फसल ख़डी होती है। वहाँ पावर प्रोजेक्ट के टावर खडे किये जा रहें है, आखिर सरकार नें इतने बड़े प्रोजेक्ट को अनुमति देने से पहले क्यों नहीं सोचा की ये पावर प्रोजेक्ट जंगल का खात्मा कर देगा फिलहाल तो जहाँ टावर लगने है। वहाँ हरे भरे पेड़ काटे गये है, जब इन टावर से लाइन बिछाई जाएगी तब लाइन की जद में आने वाले हजारों हरे भरे पेड़ और काटे जायेगे, और इन हरे भरे पेड़ों की मार्किंग भी कर दी गई है,अब जंगल का सबसे बड़ा नुकसान होगा..
कम्पनी नें जो टावर खड़ा करने के लिए बिना अनुमति विस्फोट का इस्तेमाल जंगल में किया उसकी जाँच होंगी या नहीं होंगी कुछ कहा नहीं जा सकता फिलहाल तो जंगल मे मोर नाचा किसने देखा की तर्ज पर काम चल रहा है, कोई भी केंद्रीय प्रोजेक्ट के मामले मे दखल देने को तैयार नहीं है,इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है,की सरकार का कितना डर है, प्रोजेक्ट के कर्ताधर्ता कुछ भी अवैध काम भी करें तो कार्यवाही नहीं की जा रही है, इस पुरे मामले को उजागर करने के बाद अब अफसरों मे हड़कंप मचा हुआ है सब अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ने मे लगे है,क्युकी इस पुरे मामले मे सफ़ेदपोश बड़े लोग है जिनके ऊपर कोई हाथ नहीं डाल सकता…
यहाँ के एक जागरूक स्थानीय जंगल प्रेमी नें नाम ना छापने की शर्त पर बताया की वो अब नेशनल ग्रीन ट्यूबनल यानि एन.जी.टी.मे इस पुरे मामले की शिकायत करेंगे और जंगल बचाने की कोशिश करेंगे….
ये है नियम,, नियम अनुसार वन सीमा से 250 मीटर की परिधि के अंदर कोई कंपनी या व्यक्ति किसी प्रकार का उत्खनन, ब्लास्टिंग,माल डंपिंग नहीं कर सकता। इसके अलावा हाइवे से भी 250 मीटर की दूर पर उत्खनन करने का प्रावधान है।

विस्फोट करने से पहले वन विभाग, जिला कलेक्टर, और पुलिस विभाग की अनुमति लगती है,जो की कंपनी के कर्ताधर्ताओ के द्वारा नहीं ली गई,अब पुलिस को भी संबधित कम्पनी और उसके जिम्मेदार लोगो पर जाँच के बाद विस्फोटक अधिनियम के तहत कार्यवाही करनी चाहिए नहीं तो आगे भी ऐसी ब्लास्टिंग से जंगल और मानव जीवन को खतरा पहुच सकता है, कोई बड़ी दुर्घटना इस अवैध ब्लास्टिंग से हो जाती और जंगल मे आग लग जाती , या जंगली जानवर मर जाते कुछ भी हो सकता था, तब इसका जिम्मेदार कौन होता, अवैध ब्लास्टिंग के लिए किन किन लोगो नें विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल किया और कौन लोग इसमें शामिल है, इस पुरे मामले मे संज्ञान लेकर जिला कलेक्टर और वन विभाग, और पुलिस विभाग को सख्त कार्यवाही करना चाहिए..

इनका कहना एसडीओ जावद मे छुट्टी पर हुं आप डीएफओ साहब से बात कर लीजिए वैसे जंगल मे ब्लास्ट की अनुमति नहीं दी जा सकती है।ऐसा हुआ तो ये अवैध कार्य है।
जब इस पुरे मामले को लेकर डीएफओ नीमच से फोन पर बात करने के फोन किया तो पूरी घंटी के बाद भी उन्होंने नें फोन नहीं उठाया…

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Author: jtvbharat