बंधुबेलड़ी आचार्य श्री जिनचन्द्रसागरजी की हुई गुणानुवाद सभा

अनिल भरावा आलोट

गुजरात में अहमदाबाद पालिताणा हाईवे पर स्थित सुप्रसिद्ध श्री अयोध्यापुरम तीर्थ, एवं सुमेरू नवकार तीर्थ, वडोदरा के स्थापक बंधुबेलडी श्री जिनचन्द्रसागरसूरीजी महाराज का गत रात्री में अयोध्यापुरम तीर्थ में कालधर्म हो गया;

गुरूदेव की स्मृति एवं श्रद्वान्जली स्वरूप श्री नागेश्वर पार्श्वनाथ तीर्थ में विराजित पूज्य आचार्य श्री देवचन्द्रसागरजी म.सा. एवं साध्वी श्री मुक्तिप्रियाश्रीजी म.सा. की निश्रा में गुणानवाद सभा का आयोजन किया गया।

इस दौरान स्थानीय श्रीसंघ सहीत कई तीर्थ यात्रियों ने दिवंगत गुरूदेव को श्रद्धान्जली प्रदान की। आचार्य श्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मृत्यु शाश्वत है, तथा आगम में मृत्यु से डरने वाले को नास्तिक एवं जन्म लेने (पुर्नजन्म) से डरने वाले को आस्तिक कहा है,जिन शासन में जन्म मरण के बंधन से मुक्त होकर मोक्ष की प्राप्ति को परम लक्ष्य माना गय है। दिवंगत आचार्य श्री जिनचन्द्रसागरजी महाराज की सात्विकता, साहसिकता, सरलता,
सत्प्रेरणा, उत्तम बुद्धिमत्ता और विशिष्ट प्रबंधन कुशलता के साथ ही अपने सुरील कंठ से प्रभु की स्तवना करना युगो युगों तक अविस्मरणीय रहेगा।

इस अवसर पर मोहनलाल जैन, नरेन्द्र कोठारी एवं पारस जैन आदि ने गुरूदेव को अपने विचार व्यक्त कर भाव पुष्प अपिर्त किये, संचालन चांदमल जैन ने किया। सभी गुरु भक्तो ने गुरुदेव के चित्र पर पुष्प एवं वासक्षेप से गुरु पूजन किया

jtvbharat
Author: jtvbharat