
इन्दौर फर्स्ट जिला ब्यूरो मुकेश चतुर्वेदी
गंजबासौदा। निकटस्थ ग्राम विस्कावली में श्री हरिहर धाम की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव एवं श्री रुद्र महायज्ञ के अवसर पर आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के विश्राम सप्तम दिवस में भारत राष्ट्र गौरव सम्मान से सम्मानित कथा व्यास डॉ.अभिषेक कृष्ण शास्त्री ने शिव कथा का वाचन करते हुए 12 ज्योतिर्लिंगों की महत्ता के बारे में बताते हुए कहा कि भगवान शिवजी जहां-जहां स्वयं प्रगट हुए, उन्हीं 12 स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को पवित्र ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है। इन 12 ज्योतिर्लिंगों के न सिर्फ दर्शन करने पर शिव भक्त को विशेष फल की प्राप्ति होती है बल्कि इनका महज प्रतिदिन नाम लेने मात्र से जीवन के सभी दु:ख दूर हो जाते हैं। मान्यता के अनुसार महान भगवान शिव अत्यंत भोले हैं। इसी कारण इनका एक नाम भोलेनाथ भी है, माना जाता है कि यह अपने समस्त भक्तों को मोक्ष प्रदान करते हैं। भगवान शिव का प्रतिनिधित्व शिवलिंग भी करते हैं, इनमें भी सबसे अनूठे और दिव्य 12 ज्योतिर्लिंग हैं। इन 12 ज्योतिर्लिंगों को द्वादश ज्योतिर्लिंग भी कहा जाता है, जो सनातन धर्म में पूजा के विशेष स्थल हैं। यह भी मान्यता है कि 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने से व्यक्ति जीवन और मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग का वर्णन करते हुए प्रत्येक ज्योतिर्लिंग की महता के बारे में बताया। डॉ शास्त्री ने कहा कि शास्त्रों में वर्णित हैं कि भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों की उपासना करने से साधक को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। जो प्रतिदिन प्रात:काल उठकर इन बारह ज्योतिर्लिंगों के नाम का पाठ करता है, उसके सभी प्रकार के पाप छूट जाते हैं और उसको संपूर्ण सिद्धियों का फल प्राप्त हो जाता है। शिव पुराण के अनुसार, भगवान शिवजी जहां-जहां स्वयं प्रगट हुए, उन्हीं 12 स्थानों पर स्थित शिवलिंगों को पवित्र ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूजा जाता है। इन 12 ज्योतिर्लिंगों के न सिर्फ दर्शन करने पर शिव भक्त को विशेष फल की प्राप्ति होती है बल्कि इनका महज प्रतिदिन नाम लेने मात्र से जीवन के सभी दु:ख दूर हो जाते हैं। सनातन धर्म में भगवान शिव की उपासना सृष्टि के संहारक के रूप में की जाती है। माना जाता है कि भगवान शिव की उपासना करने से व्यक्ति के सभी कष्टों का संहार हो जाता है। इसके साथ हिंदू धर्म में भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों की उपासना की भी विशेष मान्यता है। कथा के विश्राम में प्रधान यजमान श्रीमति राजकुमारी हरिसिंह सिकरवार एवं सम्पूर्ण परिवार द्वारा श्री शिव महापुराण की आरती की गई। कथा के दौरान डॉ शास्त्री द्वारा गाए गए भजनों में सभी श्रोता आनंद मग्न रहे।