
पीएमसी कंप्यूटर ऑपरेटर अशोक वर्मा की सेवा समाप्त तो कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी की क्यों नही………?
आशीष वाणी
अलीराजपुर :- जिले में विगत दिनों एक और भ्रष्टाचार का मामला सामने आया था जहां पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी पर स्व-सहायता समूहों से रिश्वत की लेने के आरोप महिलाओ सहित अन्य लोगो ने लगाए थे,इसकी शिकायत कलेक्टर साहब को मिली की कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी सुनीता मसराम और PMC ऑपरेटर आशोक वर्मा के द्वारा समूह को सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकान आवंटित करने और पीओएस मशीन उपलब्ध कराने के लिए 30 हजार रुपए से लेकर 50 हजार रुपए तक की मांग की गई थी,वही समूह के व्यक्तियों ने बताया की पैसे देने के बाद भी समूह की महिलाओं को आज तक ना तो दुकान आवंटित हुई और ना किसी को नौकरी मिली !
इसमें महादेव समूह ग्राम चुलिया कनेश आजीविका समहू ग्राम तलावद से पचास हजार रुपए, वहीं शिवगंगा समूह कोसदुना , शिव सहायता समूह , पायल समूह उती से पीडीएफ़ मशीन देने और दुकान के संचालन के लिए 50 हजार की मांग की गई थी।
जिसकी जांच उपरांत कलेक्टर अलीराजपुर ने कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी सुनीता मसराम को निलंबित किया वही PMC ऑपरेटर आशोक वर्मा की सेवा समाप्त की गई है ।
कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी पर पूर्व में भी निलंबन की कार्यवाही हुई
1 पहला मामला पद के प्रति लापरवाही और उदासीनता का
कलेक्टर सुरभि गुप्ता ने कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी चंद्रशेखर आजाद नगर सुश्री सुनीता मसराम को निलंबित करते हुए विभागीय जांच संस्थित करने के आदेश जारी किए हैं ।उक्त कार्रवाई कलेक्टर श्रीमती गुप्ता ने सुश्री मसराम पर दिनांक 30 मार्च से कार्यपद मुख्यालय से सक्षम अधिकारी की बिना अनुमति सूचना के अनाधीकृत रूप से अनुपस्थित रहने तथा दूरभाष मोबाइल पर कॉल करने पर रिसीव नहीं करने के कारण
मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम (03) (1),(2) तथा (3) अंतर्गत कार्यालयीन पत्र क्रमांक 1488 अलीराजपुर दिनांक 31 मार्च 2021 एवं कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) चंद्रशेखर आजाद नगर द्वारा सुश्री सुनीता मसराम के विरुद्ध कारण बताओ सूचना पत्र जारी कर नियत समय सीमा में उपस्थित एवं प्रत्युत्तर प्रस्तुत करने हेतु अवसर दिया गया था , परन्तु सुश्री मसराम आज दिनांक तक अनुपस्थित रही और नहीं इस संबंध में कोई लिखित जवाब अथवा ना कोई सूचना इस कार्यलय में प्रस्तुत की गई है। सुश्री मसराम द्वारा विभाग से संबंधित सर्वोच्च प्राथमिकता वाले अभियान जैसे शत प्रतिशत आधार पर सीडिंग,सार्वजनिक वितरण प्रणाली अंतर्गत पात्रता धारी हितग्राहियों को खाद्यान्न वितरण कराना उपार्जन आदि जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में कोई रुचि नहीं ली गई है।साथ ही उन्हें आवंटित कार्यालयीन शाखा जैसे एलपीजी, उपभोक्ता संरक्षण, सीएम हेल्पलाइन इत्यादि महत्वपूर्ण शाखाओ में तथा वर्तमान में कोविद अंतर्गत अत्यावश्यक सेवाओ में कोई कार्य संपादित नहीं किया जाकर अपने पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में नितांत लापरवाही एवं उदासीता बरती जाकर वरिष्ठ के आदेशों की पूर्णरूप से अवहेलना का स्पष्ट दृष्टिगोचर है। कलेक्टर श्रीमती गुप्ता ने मध्य प्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील) नियम 09 (क) प्रावधान अंतर्गत सुश्री सुनीता मसराम कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी चंद्रशेखर आजाद नगर जिला अलीराजपुर को निलंबित करते हुए उनका मुख्यालय कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व ) अनुभाग कट्ठीवाड़ा जिला अलीराजपुर नियत किया है. साथ ही सुश्री सुनीता मसराम के विरुद्ध म0 प्र0 सिविल सेवा( वर्गीकरण नियंत्रण तथा अपील ) नियम 1966 के नियम 14 के तहत विभागीय जांच किए जाने के आदेश भी जारी किए हैं। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता रहेगी ।
इसके बाद इनको पुनः बहाल किया जाकर कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी जैसा महत्वपूर्ण दायित्व दिया गया।
इनको बहाल करने और जांच में क्या कार्यवाही हुई यह केवल विभाग ही जाने केसे क्लीन चिट दी गई……
2 दूसरा मामला
स्व सहायता समूह हो से रिश्वत मांगने का मामला
कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी निलंबित
कलेक्टर ने 7 दिन में दिए जांच के आदेश
खाघ एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी की ओर से स्व सहायता समूह से रिश्वत की मांग करने की शिकायत कलेक्टर राघवेंद्र सिंह को मिली।इसे गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने अपर कलेक्टर को 7 दिवस के भीतर जांच एसपीपी
सोपने के आदेश जारी किए ।वहीं कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी को निलंबित कर दिया है ।
जानकारी के अनुसार कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी की ओर से 5 सहायता समूह से रिश्वत मांगने की बात सामने आ रही है ।कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी सुनीता मसराम ने समूह को सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकान आवंटित करने और पीएसओ मशीन उपलब्ध कराने के लिए 50 हजार रुपए से लेकर 05 हजार तक की मांग की थी।
इसमें नर्मदा सहायता समूह जवानिया से रुपया 50 हजार वहीं साइ कृपा समूह, कृपा समूह खंडाला, महादेव मतदाता समूह जामली, पायल समूह उती से पीडीएफ मशीन देने और दुकान के संचालन के लिए 5- 5 हजार खर्चा की मांग की गई थी।
मामले की गंभीरता के कारण कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने पत्र क्रमांक 144 दिनांक 5/4/.2023 से आदेश जारी करते हुए कनिष्ठ अधिकारी को नोटिस दिया। वहीं सभी मामले की जांच अपर कलेक्टर को
सौंपकर 7 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए । इस अवधि में कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी का मुख्यालय अनुविभागीय अधिकारी जोबट नियत किया गया है।
इसमें इनके खिलाफ क्या जांच हुई,क्या कार्यवाही हुई और क्लीन चिट केसे मिलि विभाग ही जाने
दोनो बार पूर्व में निलंबन की कार्यवाही से यह तो स्पष्ट दिखाई दे रहा है कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी सुश्री सुनीता मसराम अपने कर्तव्य के प्रति लापरवाह रही है तब भी तत्कालीन क्लेक्टर ने निलंबित किया था उसके बाद
दूसरी बार इनके द्वारा स्व सहायता समूह से भी रिश्वत मांगने की बात सामने आई थी और तत्कालीन कलेक्टर ने निलंबित भी किया था।
कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी को कलेक्टर सुरभि गुप्ता और कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने सुनीता मसराम को निलंबित कर दिया था, उसके बाद दोनो बार बहाल कर उसी कार्यालय में उन्हें पुन पदस्थ करना बड़े सवाल खड़ा करता दिखाई दे रहा है इसका जवाब अधिकारी ही अच्छी तरह से दे सकते है…?
अब पुनः कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी सुनीता मसराम पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और उनके साथ ही पीएमसी आपरेटर अशोक वर्मा पर भी आरोप लगे लेकिन सुनीता मसराम को निलंबन करना और पीएमसी कंप्यूटर ऑपरेटर अशोक वर्मा की सेवा समाप्त की गई तो इनको भी सेवा से प्रथक करना चाहिए था क्योंकि दूसरी बार रिश्वत मांगने की शिकायत सामने आई बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के स्व सहायता समूहो के द्वारा प्रत्यक्ष में शिकायत की ओर जिसके समाचार प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी प्रसारित हुए थे जिसमे खुलेआम रिश्वत मांगने के आरोप ग्रामीण क्षेत्रों के स्व सहायता समूहो की महिलाए और पुरुष लगाते नजर आए है।
देश में पदस्थ केंद्र की भाजपा सरकार के साथ ही प्रदेश की भाजपा सरकार और खास कर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव भी भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रवैया अपनाए हुए है तो फिर भ्रष्टाचार की दूसरी बार शिकायत मिलने के बाद भी ऐसे अधिकारी को केवल निलंबित किया गया जबकि इनको भोले भाले आदिवासियों के समूह से रिश्वत मांगने के आरोप में कड़ी कार्यवाही कर सेवा समाप्त करनी चाहिए थी।
क्या प्रदेश की भाजपा सरकार इस आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में भोले भाले आदिवासी भाईयो से रिश्वत मांगने के आरोप में निलंबित कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारी सुनीता मसराम और सेवा समाप्त पीएमसी आपरेटर अशोक वर्मा के विरुद्ध जिला स्तर के अधिकारी के बजाय उच्च स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों से इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच भोपाल से कराने के आदेश प्रदान करेंगे…… ताकि फिर कोई अधिकारी आदिवासी जिले में रिश्वत मांगने की हिम्मत न कर सके।