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इन्दौर :- श्रीमध्य भारत हिन्दी साहित्य समिति इंदौर में कालजयी साहित्यकारों के पुण्यस्मरण की 75 वीं कड़ी में आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए
वीणा के सम्पादक राकेश शर्मा ने कहा कि जिस अवध की माटी से तुलसीदास और जायसी का संबंध रहा हैऔर जिस मिट्टी से महावीर प्रसाद द्विवेदी, निराला और रामविलास शर्मा जुड़े रहे उससे नंद दुलारे बाजपेई का भी अटूट संबंध रहा है।उन्होंने छायावाद की परिकल्पनाओं को ध्वस्त होने से बचाया और उसे प्रतिष्ठा दिलाई है।साहित्यमंत्री डॉ.पद्मासिंह ने कहा कि7वर्ष की आयु में पाणिनी के अष्टाध्यायी व अमरकोष के मुख्य अंश कंठस्थ करने वाले विलक्षण प्रतिभावान आचार्य नन्ददुलारे वाजपेयी ने भारतीयता और राष्ट्रीयता को रचनात्मक सौंदर्यबोध से जोड़ा। आपने हिन्दी समीक्षा के क्षेत्र में भारतीय और पाश्चात्य समन्वयात्मक दृष्टिकोण अपनाया।.आभा होल्कर ने कहा कि भाषा और व्याकरण पर असाधारण अधिकार रखने वाले वाजपेयी जी का नाम हिंदी आलोचना में रामचंद्र शुक्ल के बाद बड़े आदर से लिया जाता है।
डॉक्टर आरती दुबे ने कहा कि उज्जैन के कुलपति रहे वाजपेयी जी ने सूरसागर और रामचरितमानस का सम्पादन किया है। राधिका इंगले ने कहा कि “हिन्दी साहित्य का इतिहास “व साहित्यकारों पर लिखी उनकी पुस्तकें महत्वपूर्ण हैं।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. पद्मासिंह ने किया व आभार समिति के प्रधानमंत्रीश्री अरविंद जवलेकर ने माना।
इस अवसर राजेश शर्मा अश्विनखरे,विजयखण्डेलवाल,दिनेशनाथ आदि अनेक लोगों ने उपस्थित रह कर श्रद्धा सुमन अर्पित किए।