
मिट्टी के दीपकों से जगमग होंगे घर और आंगन
लाखों दीयो की खपत,निर्माण में जुटे कुम्हार समाज
बाग:-रोशनी से सराबोर प्रकाश पर्व दीपावली पर दीपकों का सबसे अधिक महत्व रहता है। पर्व नजदीक आते ही दीप बनाने के लिए चक्रों की गति तेज हो गई हैं। घर-आंगन को जगमगाने के लिए देशी दीपकों का निर्माण कुम्हार समाजजन तेजी से कर रहे हैं।
दीपावली पर्व पर जिले सहित संभाग में करीब 30 से 135 लाख दीपकों की
खपत होती हैं। इसमें मुख्य रुप से देशी दीपक ही लोगों की पसंद रहते हैं। हालाकि फैंसी डिजाइन वाले दीपक भी बिकने आते हैं, लेकिन अधिक कीमत होने से मांग कम रहती हैं।
इससे आम लोगों का रुझान इन रेडिमेड दीपकों की ओर नहीं के बराबर रहता हैं।
इस दिवाली कुम्हारों को अच्छी आय की उम्मीद
दीपावली पर्व नजदीक आते ही कुम्हारों के चाक घूमने लगे हैं। बड़ी संख्या में मिट्टी के दीये बनाने का कार्य कुम्हारों ने गणेश स्थापना से सुरु कर दिया था। दीपक व्यवसाय से जुडे कुम्हारों को ज्यादा बिक्री होने की उम्मीद जगी है। गौरतलब है कि नगर में प्रजापत समाज के लगभग एक सौ पचास लोग दीये बनाने के कार्य में इन दिनों तेजी से जुटे हुए हैं। हर दिन बड़ी संख्या में चाक घूमाकर दीयो का निर्माण कर रहे है। इस वर्ष दीपपर्व 31 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इससे पूर्व 29 अक्टूबर को धनतैरस का त्योहार मनाया जाएगा। वहीं 1 नवंबर को गोवर्धन पूजा यानि पड़वा पर्व मनाया जाएगा। इसके अगले दिन यानि 2 नवंबर को भाईदूज का पर्व मनाया जाएगा।
हर घर जलेंगे खुशियों के दीप
मिट्टी के दीये से दीपावली में दीपक जलेंगे, हर घर में रोशनी होगी। विराट नगर बाग में दर्जनों कुम्हार दीये और मूर्ति बनाने में लगे हुए हैं। बाग के कुम्हार मोहल्ला,बायपास रोड पर जिधर भी नजर जा रही है सब के सब मिट्टी के दीये बनाने में जुटे नजर आ रहे हैं। उनको यह विश्वास है की इस बार उनके घूमते चाक से उतरने के बाद दीपक उनके घर में खुशियां लायेंगे।
कुम्हार समाज के दिपक निर्माण कर रहे बायपास निवासी पप्पू रामचंद्र प्रजापत ने चर्चा में बताया कि दो वर्ष के काल खंड मे पुश्तैनी व्यवसाय में काफी नुकसानी झेलना पड़ी हैं।इस बार दीपावली की मांग अनुरुप दीपकों का निर्माण कर रहे हैं। नगर में 40-45 प्रजापत परिवार में यह कार्य जारी हैं। दीपकों को आकार देकर पकाया व सजाया जाने में लगा हैं। दीपावली से पहले दीपक बाजार में उपलब्ध होने लगेंगे।बहार के व्यापारी को 50 से 55 पैसे प्रति नग के हिसाब से 550 से लेकर 600 रुपये तक बहार से आये थोक व्यापारी हम से खरीद रहे हैं।
वही प्रजापत समाज के ओमप्रकाश राधा किशन प्रजापत ने बताया कि कुम्हार समाज का व्यक्ति एक दिन में औसत 1500 सौ से 2 हजार दीपक बना लेता है। इनके निर्माण का कार्य गणेश स्थापना से प्रजापत समाज के कुछ परिवार प्रारंभ कर देते हैं।परन्तु जैसे ही दिपावली नजदीक आ रही है ।नवरात्रि के बाद से सभी परिवारजन दिये बनाने के काम मे लग गये है ।दीपकों को आकार देकर पकाया व सजाया जाने में लगे हुए हैं।करवा चौथ से बाजार में उपलब्ध होने लगेगे।देशी दीपकों के साथ मूर्तिनुमा, प्याले, घड़े,धोवे,कुल्लडी के आकार के आदि आकृति में भी दीपक तैयार किए जा रहे हैं।कुछ ही दिन में बाजार में उपलब्ध होंगे।