पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का प्रधानमंत्री के नाम परिवहन विभाग में घोटाले को लेकर लिखा पत्र

आदरणीय प्रधानमंत्री जी,

मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में गत दिवस उजागर हुए ट्रांसपोर्ट घोटाले की जानकारी आपको अब तक लग चुकी होगी। जिसमें करोड़ों रूपयों की जप्ती विभाग के एक पूर्व सिपाही के पास की गई है। यह आपके उस वायदे के खिलाफ है, जिसमें आप भ्रष्टाचार के विरूद्ध ‘‘न खाऊँगा न खाने दूंगा’’ जैसी बाते अक्सर हर बड़े मंच से करते है।

मध्यप्रदेश में पकड़ाये इस ‘‘परिवहन घोटाले कांड’’ की गूंज पूरे देश में हो रही है। लगभग 20 वर्षो से भारतीय जनता पार्टी शासित मध्यप्रेदश के परिवहन विभाग में काम करने वाले पूर्व सिपाही सौरभ शर्मा के यहॉ 19 दिसम्बर 2024 को 3 करोड़ रूपयें नकद और 200 किलो चांदी की सिल्लियों के साथ बेनामी सम्पत्तियों के अनेक दस्तावेज मिले है। इसी व्यक्ति के साथी के पास जब्त कार में 52 किलो सोना और 11 करोड़ नकद मिले है। यह भी जानकारी मिली है कि आयकर विभाग ने एक ऐसी डायरी जब्त की है जिसमें अधिकारी, नेता और व्यापारियों के नाम है। लोगों में चर्चा है कि पूर्व परिवहन मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री के यहॉ परिवहन घोटाले का कितना माल पहुँचा होगा।

पूरे प्रदेश को अचंभित कर झंझकोर कर रख देने वाले ‘‘परिवहन घोटाले कांड’’ को उजागर करने वाली आयकर विभाग और मध्यप्रदेश लोकायुक्त का दल बधाई का हकदार है। जिसने ‘‘मध्यप्रदेश के ज्ञात इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला’’ पकड़कर भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात करने वाले राज्य सरकार की कथनी और करनी को बेनकाब कर दिया है। सौरभ शर्मा नाम के जिस पूर्व आरक्षक पर इस करोड़ों रूपये के भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया गया है। उसे सागर निवासी पूर्व परिवहन मंत्री का सीधा संरक्षण प्राप्त था। मुझे जानकारी मिली है कि सौरभ शर्मा पूर्व परिवहन मंत्री के परिवार के सदस्य की तरह बंगले पर बैठता था, जहां वकील साहब के नाम से मशहूर संजय श्रीवास्तव के साथ बैठकर पूरे प्रदेश में परिवहन विभाग के करोड़ों रूपये के लेन-देन का हिसाब किताब रखता था।

भाजपा की शिवराज सरकार ने सारे नियमों को दरकिनार कर सौरभ शर्मा को परिवहन विभाग में आरक्षक के पद पर नौकरी दी थी। छोटी सी सेवा अवधि के दौरान सौरभ शर्मा पर भ्रष्टाचार की अनेक शिकायतें शीर्ष स्तर पर की गई थी। पूर्व परिवहन मंत्री के लिये उगाही करने वाले सौरभ शर्मा की शिकायतों की जांच कराने की जगह विभागीय मंत्री के दबाव में विभाग ने उसका इस्तीफा स्वीकार कर कार्यमुक्त कर दिया। परिवहन आरक्षक की वर्दी से मुक्ति पाने के बाद इस पूर्व आरक्षक ने मंत्री के खुले संरक्षण में रहकर मध्यप्रदेश में करोड़ों रूपये प्रति माह की कमाई कराने वाले खवासा, चिरूला, मुलताई, खुरई, पढोरा जैसे चेक पोस्ट ठेके पर ले लिये।

परिवहन मंत्री के चहेते और कमाऊ पूत बने सौरभ शर्मा ने संजय श्रीवास्तव, आर.टी.आई. वीरेश तुमराम, पूर्व आर.टी.आई. दशरथ सिंह पटेल के साथ मिलकर पूरे प्रदेश में संचालित आर.टी.ओ. बेरियर पर वसूली का ठेका ले लिया। ये वसूली गैंग मंत्री के सीधे नियंत्रण में अफसरों के ट्रांसफर और पोस्टिंग कराया करते थे। इनके विश्वासपात्र प्रायवेट कटर चेकपोस्ट पर उगाही करके हिसाब अपने आकाओं तक पहुँचाया करते थे।

मेरा सीधा आरोप है कि पूर्व परिवहन मंत्री के खासमखास उपरोक्त वर्णित चारों लोगों को गिरफ्तार कर सख्ती से पूछताछ की जाये तो मनी लांड्रिंग की पूरी चेन सामने आ जायेगी। प्रवर्तन निदेशालय को इस मामलें में धन शोधन निवारण अधिनियम (Prevention of Money-Laundering Act) के तहत सभी आरोपियों पर मामला दर्ज कर परिवहन कांड में लिप्त गैंग से सघन जांच पड़ताल करनी चाहिये। जिसके तार शीर्ष नौकरशाहों से होकर पूर्व परिवहन मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री तक जुड़ें मिलेंगे।

मध्यप्रदेश के लोग आपसे आशा कर रहे है कि आप ‘‘भ्रष्टाचार न करने देने’’ के बहुचर्चित भाषण के अनुरूप मध्यप्रदेश के अब तक के सबसे बड़े ‘‘भ्रष्टाचार कांड’’ में शामिल बड़ी मछलियों केा पकड़कर बेनकाब करने के लिये केन्द्रीय जांच एजेंसी आई.टी., ई.डी. को खुली छूट देंगें। मैं उम्मीद करता हूँ कि आपकी पहल आपके ‘‘मनसा, वाचा, कर्मणा’’ के सिद्धांत पर खरी उतरेगी। मध्यप्रदेश के लोकायुक्त के अधीन कार्यरत जिम्मेदार बल ने भी यह कांड उजागर कर संगठन की साख बढ़ाई है।

अब तक की जांच में यह जानकारी सामने आई है कि प्रदेश में करोड़ों, अरबों रूपयों की नामी बेनामी सम्पत्ति का साम्राज्य खड़ा किया गया है। अनेक बिल्डर, नौकरशाह और व्यापारी इस जांच के जद में आ रहे है, जो अपने रसूख से मामले को ठंडा करने का प्रयास करेंगे।

मेरी मांग है कि परिवहन घोटाले की जांच मध्यप्रदेश के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश की निगरानी में कराई जाये। जांच में प्राप्त बेनामी सम्पत्तियाँ कुर्क की जाकर धनराशि शासकीय खजाने में जमा की जाये। जांच का दायरा बठाया जाकर आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की जाये। निष्पक्ष जांच होने पर आपसी पार्टी के अनेक सफेदपोश नेता बेनकाब हो जायेंगे, पर ऐसे लोगों पर आपके द्वारा कार्यवाही कराने से प्रदेश और देश में यह संदेश जायेगा कि आप जो कहते है, वह करके भी दिखाते है। मुझे प्राप्त और आपको प्रेषित जानकारी में यदि कोई विसंगति पाई जाये तो मैं हर स्तर पर जवाबदारी लेने को तैयार हूँ।

पूरे देश में मध्यप्रदेश को भ्रष्टाचार में कलंकित करने वाले कांड ने शर्मसार कर दिया है। शीर्ष स्तर पर बैठे मंत्री यदि बागड़ बन कर खेत खाने लगेगे तो प्रदेश का क्या हाल किया होगा, यह चिंता का विषय है। मैं प्रदेश के करोड़ों ईमानदार लोगों के विश्वास की बहाली के लिये आपसे पुनः निवेदन करता हूँ कि ‘‘करोड़ों रूपये के परिवहन कांड’’ की मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश की निगरानी में जांच कराने का निर्णय लेने का कष्ट करें।

सहयोग के लिए मैं आपका आभारी रहूँगा।

सादर,

आपका
/
(दिग्विजय सिंह)

श्री नरेन्द्र मोदी जी
माननीय प्रधानमंत्री,
भारत सरकार, नई दिल्ली

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Author: jtvbharat