
1 किलोमीटर पैदल चलकर आना पड़ता है गाव में यात्रियों को
परवलिया(हरीश पँचाल) गाव परवलिया में प्रतिदन चलने वाली थांदला से काकनवानी की बस बीच मे आने वाले गाव परवलिया के अंदर नही आती बल्कि परवलिया गाव से 1 किलोमीटर दूर परवलिया फाटक पर परवलिया की सवारी उतार देती है जिससे बच्चे बुजुर्ग महिलाओं को पैदल इतना दूर चलकर आना पड़ता है बल्कि इनसे किराया पूरा वसूल किया जाता है क्षेत्र में इस रूट पर सबसे ज्यादा या यही बसे चलती है ऐसे में यह बस का स्टाफ मनमाने रूप से गाव के बाहर उतार देते है कई बार ड्राइवर कंडक्टर को कहा जाता है तो कहते है नही जाएगी कई बार गाव के लोगो ने मिलकर कहा तो 2 4 दिन बस आई फिर बंद हो गई सुबह 1- 2 बसे आती है बाकी दिनभर नही आती बल्कि ज्यादा परेशानी पैदल चलने में दोपहर शाम को ही आती है
हाईस्कूल हाई सेकंडरी स्कूल है परवलिया में
गाव में शासकीय हाई स्कूल जिसमे काकनवानी तरफ से कई छात्र छात्राएं पढ़ाई करने आते है ऐसे में उन्हें भी वही उतार दिया जाता है जिससे स्कूल पैदल 1 किलोमिटर चलकर आना पड़ता है वही घर जाने के लिए फिर से पैदल चलकर जाना पड़ता है ऐसे में कई बार स्कूल समय से नही पहुच पाते है व छात्राओं को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है
अंधेरा होने पर भी फाटक पर छोड़ दिया जाता है
काकनवानी व थांदला से आने वाली बसे शाम को अंधेरा हो जाता है तब भी सवारी को फाटक पर उतार दिया जाता है जिसमे महिलाएं भी होती है ऐसे में वह खुद को असुरक्षित महसूस करती है व इस बीच कोई हादसा भी हो सकता है ऐसे में कोन जिम्मेदार
गर्मियों में बुजुर्ग को भी फाटक पर उतार दिया जिससे वह पैदल चलने में असमर्थ होते है तो कई बार चक्कर खाकर गिर जाते है
जैन बस के संचालन कर्ता के अनुसार के हम तो कहते है बस अंदर ले जाओ
लेकिन उनके कहने के बाद 2- 4 दिन तक बस आती है फीर मनमाने तरीके से सवारी को 1 किलोमीटर छोड़ दिया जाता है
बसो में न किराया सूची न नियम अनुसार कुछ नही
बसों में न ही किराया सूची है न परीवहन विभाग द्वारा बनाए नियम के अनुसार सुविधा ऐसे में परिवहन विभाग बसे चेक करें बस को गाव के अंदर लाने के लिए किए आदेशित करे क्योंकि यात्री बस को चलाने की अनुमति में रुट बताए गए होंगे
यह समस्या सालों से बनी हुई है कुछ लोग आवाज उठाते है तो 4 से 5 दिन तक बस आती है फिर वही हाल
गरीब व आदिवासी वर्ग सबसे ज्यादा इन बसों में सफर करते है ऐसे में इनको सबसे ज्यादा परेशानी आती है और यह लोग कुछ बोल भी नही पाते जितने रु लिए जाते दे दिए जाते है और ज़ह उतारा उतर जाते है क्योंकि सक्षम वर्ग के पास स्वयं का वाहन है वह परेशान नही होते अगर वह इन बसों में सफर करते तो निश्चित बस गाव में आती
इस ओर जनप्रतिनिधि विधायक सांसद और भी शासन प्रशासन के लोगो को मिलकर समस्या का समाधान करवाना चाहिए जिससे आमजन को सुविधा मिल सके व बच्चे बुजुर्ग महिला पैदल चलने को मजबूर न हो