बावनगजा का मेला अखण्ड जैनत्व की एकता व अखण्ड वात्सल्य का प्रतीक है =आचार्य श्री विप्रणत सागर जी

84 फिट उत्तुंग भगवान आदिनाथ के हुए मस्तकाभिषेक ,चढ़ाया निर्वाण लाडू

* रघुनाथ सेन*
बडवानी:- जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर आदिम ब्रह्मा आदि तीर्थंकर भगवान ऋषभ देव का मोक्षणकल्याणक दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र बावनगजा जी पर दो दिवसीय मेले के रूप में धूम धाम से मनाया गया ,जहां विराजित आचार्य श्री विप्रणत सागर जी महाराज ने विशाल धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि बावनगजा का ये मेला कोई धार्मिक, साहित्यिक,या संस्कृतिक मेला नहीं है ये मेला तो अखण्ड जैनत्व की एकता व अखण्ड वात्सल्य का प्रतीक है आचार्य श्री ने बेहद काव्य शैली में धर्म सभा में सभी श्रावकों को रोमांचित कर नव चेतना से भर दिया ।आचार्य श्री ने कहा जो एक बार भगवान आदिनाथ का नाम दिल और श्रद्धा पूर्वक ले लेता है उसे 64 पुण्य तीर्थ के दर्शन करने का पुण्य लाभ मिलता है,आगे गुरुदेव ने कहा कि मौनी अमावस्या का प्रवर्तन भी आदिनाथ भगवान के बाद हुआ भगवान आदिनाथ के मोक्ष के बाद भरत चक्रवर्ती को भी आंसू आ गए थे वो इसलिए कि अब में किस के दर्शन करूंगा,कैसे समवशरण में धर्म वाणी श्रवण करूंगा कौन मेरी धार्मिक जिज्ञासा को पूर्ण करेगा। आज आदिनाथ भगवान हमारे बीच होते तो हमे भी उनके दर्शन करने और उनके समवशरण में बैठने का सौभाग्य प्राप्त होता और देशना सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता भगवान ने अष्ट कर्म का नाश कर मोक्ष को प्राप्त कर लिए उनको तो खुशी प्राप्त हो गई पर हमें दुख है क्योंकि अगर वो होते तो हमे धर्म सभा श्रवण करने को मिलती ,आगे बोला कि बावनगजा को सिद्ध क्षेत्र का गौरव प्राप्त है ये अतिशय सिद्ध भूमि है आज इस दिन सभी नियम ले लो हम को खण्ड खण्ड हो रहे है हम सभी एकता के सूत्र में बंधेंगे मेला इसलिए होता है कि हम सभी एक सूत्र में बंधे रहे और एक जुट हो कर राजनीति मे भी अपना दखल रख कर भाग ले पहले हमारे समाज का अच्छा प्रतिनिधि राजनीति ने होता था अब वो शून्य सा है।आज मोक्ष कल्याणक पर हमे अभिषेक करना है जिन धर्म की रक्षा हेतु सच्चा जैन बनना है ,समाज के व्यक्ति के लिए हमारे दिल में ममत्व का भाव उमड़ना चाहिए,जय जिनेन्द्र करना सम्यक दर्शन का सातवां अंग है वात्सल्य और तभी जिन धर्म की प्रभावना कर पाओगे जैन धर्म की प्रभावना के लिए एक जुट हो जाओ धर्म की रक्षा के लिए सदा आगे रहो आचार्य श्री ने आगे समाज जन को नसीहत दी कि अपने नाम के आगे जैन ही लिखे साथ ही मंदिर में धर्मनीति करिए राजनीति नहीं धर्म में राजनीति आती है तो धर्म बिगड़ जाता है और राजनीति में धर्म आ जाता है तो राजनीति सुधर जाती है
इस अवसर पर नीति आयोग की सदस्य अर्चना जैन ने भी संबोधित करते हुए कहा कि आगामी महा मस्तकाभिषेक के लिए में मुनि पुंगव सुधा सागर जी से जीर्णोद्धार की स्वीकृति का प्रयास कर क्षेत्र पर लाने का प्रयास करूंगी और समस्त उपस्थित जैन श्रावकों से अपील की ,सभी अपने नाम के आगे जैन ही लिखे जिससे हमारी सही जन संख्या मालूम हो ।इस अवसर पर वन एवं पर्यावरण सचिव मध्य प्रदेश शासन ने भी आचार्य संघ को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया और संबोधित करते हुए वृक्षारोपण करने और स्टॉप डेम की स्वीकृति प्रदान की ,ट्रस्ट अध्यक्ष विनोद दोशी ने साधारण सभा को संचालित कर कार्यों की समीक्षा की और आगामी योजनाओं को विस्तार पूर्वक बताया उसके पूर्व प्रातः आचार्य श्री के सानिध्य और पंडित मौसम जी शास्त्री के मंत्रोच्चार से ध्वजारोहण हुआ और आचार्य श्री की आहार चर्या हुई।
पश्चात आचार्य संघ को सम्मान सहित मंच पर विराजित किया गया जहां अर्चना जैन नीति आयोग सदस्य और ट्रस्ट सदस्यों द्वारा भगवान आदिनाथ की तस्वीर का चित्र अनावरण कर दीप प्रज्वलन किया, गुरुकुल के बच्चों द्वारा मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया कार्यक्रम का संचालन विपुल गंगवाल ने किया और बोलियों का संचालन मौसम शास्त्री ने किया युवासंघ बड़वानी ने आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य प्राप्त किया शास्त्र भेंट नीति आयोग की सदस्य अर्चना जैन ने किया और जितने भी पुण्यार्जक परिवार थे उनका सम्मान किया गया पश्चात तलहटी से बड़े बाबा तक बैंड बाजे,ढोल ताशे और जिन धर्म ध्वजा के साथ घट और शोभा यात्रा निकाली गई जहां आज भगवान के प्रथम अभिषेक करने का सौभाग्य निर्मल मोहन लाल अग्रवाल राणापुर परिवार को प्राप्त हुआ तो द्वितीय कलश करने का सौभाग्य शैफाली सौरभ टोंग्या परिवार इंदौर को प्राप्त हुआ तो प्रथम शांति धारा शेखर जुगल किशोर पाटनी अंजड़ और द्वितीय शांतिधारा दिलीप रश्मि बाकलीवाल बड़नगर इंदौर को प्राप्त हुए निर्वाण लाडू चढ़ाने का सौभाग्य शेखर जुगल पाटनी अंजड़ परिवार को प्राप्त हुआ और भगवान के शुद्ध जल के 1008 कलश से अभिषेक हुए ।

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Author: jtvbharat