रवींद्रनाथ टैगोर की पंक्तियां को अपने फैसले में शामिल करते हुए हत्यारी मां को उम्र कैद कोर्ट ने कहा बेटी का जन्म यानी ईश्वर मानव जाति से अप्रसन्न नहीं है

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16 सितंबर 2020 को एक मां ने ही मासूम को डुबोकर हत्या कर दी थी
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सबूत है, कि ईश्वर मानव जाति से अप्रसन्न नहीं है, क्योंकि ईश्वर पुत्रियों के माध्यम से स्वयं को साकार रूप देता है।’ कवि रविन्द्रनाथ टैगोर की इन पंक्तियों को अपने फैसले में शामिल करते हुए भोपाल के 23वें अपर सत्र न्यायाधीश अतुल सक्सेना ने गुरुवार शाम एक महीने की मासूम बेटी की हत्या करने वाली मां को उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही एक हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया।
घटनाक्रम 16 सितंबर 2020 को भोपाल के खजूरी इलाके में मां ने ही पानी की टंकी में डुबोकर एक महीने की मासूम बेटी की हत्या कर दी थी। आरोपी मां फिलहाल जेल में बंद है। इस मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक सुधा विजय सिंह भदौरिया ने पैरवी की थी। सरिता और सचिन की किंजल पहली संतान थी।
घटना के वक्त घर के सब लोग खेत पर गए थे घटना के वक्त सरिता और किंजल ही घर पर थे। बाकी घर के सभी 11 सदस्य खेत पर गए थे। दोपहर करीब 11 बजे सरिता ने चिल्लाना शुरू किया और बताया कि किंजल चारपाई पर लेटी थी, अब वह वहां नहीं है। बाद में पुलिस ने तलाश कर के बच्ची का शव पानी की टंकी में पाया।
इस घटना के बाद सरिता को ज्यूडिशियल
पति ने बताया- बेटी को देखती थी तो खुद को कोसती थी सरिता
पति सचिन मेवाड़ा ने कोर्ट को बताया कि उसने जब इस मामले में सरिता से पूछताछ की तो वह रोने लगी और किंजल की हत्या करना कबूल किया। सरिता ने अपने पति को बताया कि उसने सोचा था कि उसे बेटा होगा, लेकिन उसे बेटी हुई। वह जब-जब बेटी किंजल को देखती थी, तो खुद को कोसती थी। इसके चलते उसने जब घर खाली पाया तो बेटी को पानी की टंकी में डुबोकर मार डाला।
रिमांड पर जेल भेजा गया था, लेकिन हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। सरिता 7 महीने 12 दिन जेल में रह चुकी है।
टेस्ट से साबित हुआः पानी में डूबने से मौत होने पर डायाटम टेस्ट किया जाता है। किंजल का टेस्ट पॉजिटिव आया। टेस्ट में किंजल के पेट में 40-50 एमएल लिक्विड मिला। कोर्ट ने कहा कि एक महीने की बच्ची को ठोस पदार्थ नहीं दिया जा सकता। इसका मतलब है कि मौत से पहले सरिता ने उसे दूध पिलाया।

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Author: jtvbharat