धार जिले को झोलाछाप अवैधानिक इलाज करने वालो से कब मिलेगी मुक्ति………?

डॉ मोहन यादव की सरकार के आदेश को शायद रद्दी की टोकरी में तो डालकर भूल तो नहीं गया जिला प्रशासन

धार जिले में सेकडो झोलाछाप कर रहे एलोपैथिक पद्धति से बेखौफ इलाज किसका है इनको सरंक्षण…?

सुनील मुनिया
धार:-मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने प्रदेश में आए दिन झोलाछाप अवैधानिक रूप से बीमारों का इलाज करने वालो की कई शिकायतो और प्रतिदिन प्रिंट मीडिया और इलेक्ट्रानिक मीडिया में प्रकाशित खबरों के अलावा मानव अधिकार आयोग के सख्त रवैया को संज्ञान में लेकर झोलाछाप जो मरीजों के इलाज के लिए निजी चिकित्सालय बगैर किसी डिग्री और मान्यता के खोल के बैठे है जो मरीजों की आए दिन जान से खिलवाड़ करने वालो के लिए सख्त कार्यवाही करने के लिए जिला कलेक्टर और जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को इन पर प्रभावी नियंत्रण करने और वैधानिक कार्यवाही करने हेतु आदेश जारी करवाया है।
आयुक्त चिकित्सा शिक्षा संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मध्यप्रदेश शासन भोपाल की ओर से विनियमन/2024/248 भोपाल दिनांक 15/07/2024 से जारी किया है।
मध्य प्रदेश की डॉ मोहन यादव सरकार ने सभी 55 जिलों के कलेक्टरों और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को आदेश दिया है कि वह अपने क्षेत्र में झोलाछाप के खिलाफ अभियान शुरू करें। ऐसे सभी तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए जिनके पास कोई डिग्री डिप्लोमा नहीं है लेकिन फिर भी वह स्वयं को डॉक्टर बताते हैं।
संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मध्य प्रदेश से समस्त कलेक्टर एवं समस्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के नाम जारी परिपत्र क्रमांक 248 दिनांक 15 जुलाई 2024 में लिखा है कि, मध्य प्रदेश में कई अपात्र व्यक्तियों द्वारा फर्जी मेडिकल डिग्री अथवा सर्टिफिकेट का प्रयोग करके अमानक चिकित्सा पद्धतियों के उपयोग से मरीज का इलाज किया जा रहा है।
धार जिले में बहुत सारे ऐसे व्यक्ति एलोपैथिक पद्धति से मरीजों का इलाज कर रहे हैं जिन्होंने मेडिकल की कोई डिग्री, डिप्लोमा अथवा सर्टिफिकेट प्राप्त नहीं किया है और जो विधि के अनुसार एलोपैथिक पद्धति से इलाज करने के लिए अधिकृत नहीं है।
अपने नाम के साथ डॉक्टर शब्द कौन लिख सकता है
निर्देशित किया जाता है कि ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाए। यह भी उल्लेखनीय है कि चिकित्सा शिक्षा संस्था (नियंत्रण) अधिनियम, 1973 यथा संशोधित अधिनियम, 1975 एवं संशोधन अधिनियम, 2006 की धारा 7-ग अनुसार ” ‘डॉक्टर’ अभिधान का उस व्यक्ति के नाम के साथ उपयोग किया जा सकेगा, जो कोई मान्यता प्राप्त चिकित्सकीय अर्हता धारित करता हो और जो तत्समय प्रवृत्त विधि द्वारा स्थापित किसी बोर्ड या परिषद् या किसी अन्य संस्था में चिकित्सा व्यवसायी के रूप में रजिस्ट्रीकृत है तथा अन्य कोई व्यक्ति स्वयं को चिकित्सा व्यवसायी के रूप में अभिव्यक्त करने के लिए ‘डॉक्टर’ अभिधान का उपयोग नहीं करेगा”।

उपरोक्त वर्णित अधिनियम की धारा 7-ग के उल्लंघन में कारावास की कालावधि 3 वर्ष तक व जुर्माना पचास हजार रुपये तक का प्रावधान है। उल्लेखनीय है कि धारा 7-ग का संबंध गैर मान्यता प्राप्त चिकित्सकों से है।म.प्र उपचर्यागृह तथा रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं (रजिस्ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन) अधिनियम, 1973 की धारा 3 का उल्लघंन, न्यायालय में दोषसिद्धी (Conviction) होने पर दण्डनीय है जिसके प्रावधान धारा 8 में वर्णित हैं।

निजी चिकित्सकीय स्थापनाओं के पंजीयन एवं अनुज्ञापनकर्ता अधिकारी जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी हैं। अतएव गैर मान्यता प्राप्त संस्थाओं, अपात्र व्यक्तियों द्वारा संचालित चिकित्सकीय स्थापनाओं का संचालन पाए जाने पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा उचित विधिक कार्यवाही हेतु संबंधित जिला अभियोजन अधिकारी को प्रकरण के समस्त तथ्य तत्काल उपलब्ध कराए जाए ताकि उचित वैधानिक कार्यवाही सुनिश्चित हो सके।
ऐसा नहीं की यह आदेश पहली बार जारी हुआ है बल्कि प्रदेश सरकार ने समय समय पर झोलाछाप इलाज करने वालो के खिलाफ सख्त कार्यवाही हेतु आदेश निर्देश जारी किए है लेकिन इन आदेश निर्देश का जिले में कितनी तवोज्जो दी यह जग जाहिर है। तभी तो आज भी धार जिले के बदनावर नागदा,कानवन,
सादलपुर,पिथमपुर,सागौर,कुटी, इण्डोरामा,सरदारपुर,राजगढ,
लेबड , घाटाबिल्लोद,कोद बिडवाल,मांगोद.दसाई,राजोद,
कुक्षी,टांडा,बाग, निसरपुर,मनावर,गंधवानी, डही, डेहरी,राजोद,अमझेरा,
धारसीखेड़ा, मांडव,धामनोद,धरमपुरी,सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे एक से अनेक झोलाछाप अपना क्लिनिक संचालित करते हुए दिखाई देंगे ।
धार जिले के हर गांव शहर और प्रत्येक ग्रामीण क्षेत्रों में निजी इलाज की दुकानें खुल गई और कई झोलाछाप बगैर मान्यता डिग्री डिप्लोमा के बेरोकटोक धडल्ले से एलोपैथिक दवाइयों से इलाज भी कर रहे और इंजेक्शन के साथ साथ बोतले भी चढ़ा रहे है ऐसे झोलाछाप को मानव की जान से ज्यादा लक्ष्मी की अधिक आवश्यकता है वह इलाज करते है भले ही मरीज किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हो या गंभीर अवस्था में हो सूत्रों की माने तो आज अनेकों झोलाछाप ने एलोपैथिक दवाइयों से इलाज कर करोड़ों की दौलत एकत्रित कर आलीशान घर दुकान बना लिए है और जमीनें खरीद ली है और आज भी बेखौफ मरीजों का इलाज कर रहे है जिनको रोकने वाला कोई नहीं और कोई रोकने की कोशिश करता भी है तो कतिपय नेताओं और रसुखदार का सहारा लेकर रोब झाड़ते दिखाई देते है।
जिले में कलेक्टर और सीएमएचओ द्वारा कई शिकायत पर कार्यवाही की गई होगी और एफ आई आर भी दर्ज कराई होगी लेकिन ऐसे झोलाछाप को कोई फर्क नहीं पड़ा ओर आज भी सेकडो की तादात में पूरे जिले में फैले हुए दिखाई दे रहे है। जिला प्रशासन इनको ग्रामीण क्षेत्र से हटाने में पूरी तरह कामयाब नही हुआ है जिसके उदाहरण स्वरूप एक से अनेकों झोलाछाप की निजी प्रैक्टिस की दुकानें मिलती ही है।
अब प्रदेश सरकार ने झोलाछाप इलाज करने वालो पर कार्यवाही हेतु नया आदेश जारी किया है ।
इसको सख्ती से पालन कराने का संपूर्ण दायित्व जिला कलेक्टर का है साथ ही जवाबदारी सीएमएचओ की भी है कि वह अपने अधीनस्थ से किस प्रकार इस आदेश का पालन करवाना सुनिश्चित करते है यह कितना प्रभावी होगा यह आनेवाले दिनों में पता चलेगा या फिर यह आदेश भी हवा में झूलता दिखाई देगा और झोलाछाप द्वारा बेखौफ मरीजों का एलोपैथिक दवाइयों से इलाज जारी रहेगा और भोले भाले लोगो की जाने जाति रहेगी।
ओर हम केवल खबर लिखते ही रहेंगे खैर समाचार ओर सच्चाई से अवगत कराना और आईना दिखाना कलमकार का कर्तव्य है और कार्यवाही करना या नहीं करना जिला प्रशासन के विवेक पर निर्भर है।

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Author: jtvbharat