
राजेश नाहर,,
खेतिया:- प्लास्टिक को लेकर हो रहे शोध व अध्ययन में प्लास्टिक के मानव जीवन पर घातक प्रभाव, पर्यावरण प्रदूषण के साथ यह बात सामने आई है कि मनुष्य के मस्तिष्क में प्लास्टिक के नैनो कण भी पहुंचने लगे, दावा किया जा रहा था की प्रतिदिन सैकड़ो माइक्रोप्लास्टिक कण सांसों के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
प्रकृति को प्रदूषित करने वायु एवं जल प्रदूषण में अपने भूमिका निभाने और मानव जीवन व जंतुओं के लिए जानलेवा साबित हो रहा है बढ़ता हुआ प्लास्टिक का उपयोग ,जो एक बड़ी चुनौती व संकट है, विश्व में कई शोध प्लास्टिक पर होते रहे हैं। समय-समय पर शोध किया जा रहा, अध्ययनों से निकलने वाली टिप्पणियां प्रकाशित होती रही है। एक शोध में यह जानकारी आई की प्लास्टिक के कण पौधों की प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को प्रभावित करने लगे जिससे हमारे खाद्यान्नों तथा उनके उत्पादन में गिरावट आने लगी। प्लास्टिक का बहुलता से उपयोग एवं प्लास्टिक पर निर्भरता के कारण मानव जीवन पर संकट मंडराने लगा।
प्लास्टिक, माइक्रोप्लास्टिक हमारे जीवन में घुलने लगा है। प्लास्टिक में ऐसे बहुत से रसायन होते हैं जो कैंसर का कारण माने जा सकते हैं वहीं इसके हमारे शरीर में जाने से जटिलताएं पैदा हो रही।।
सरकार लाख प्रयास करें किंतु आम लोगों को प्लास्टिक से मुक्ति का अभियान चलना चाहिए ,,परस्पर जागृति लाना चाहिए। चिंता इस बात की है कि विकासशील देशों में सरकार रोटी,, कपड़ा और मकान जैसी मूलभूत सुविधाओं की जुगाड़ में लगे रहती, गरीबों की समस्या से जूझते हुए स्वास्थ्य को लेकर उच्च गुणवत्ता के मानक पर स्वास्थ्य सुविधा नहीं उपलब्ध करा पाती।प्लास्टिक से हो रही मानव जीवन व पर्यावरण की हानि निश्चित ही चिंता का विषय है।
मेरा मानना कुछ समय पहले जब प्लास्टिक का आविष्कार हुआ होगा तो उसे विज्ञान और मानव सभ्यता की बड़ी उपलब्धि माना गया जो अब अभिशाप हो रहा है,अब समय है कि प्लास्टिक का विकल्प तलाशा जाए ,इसका उपयोग रोका जाए। प्लास्टिक प्रदूषण न सिर्फ भारत वरन विश्व की एक बड़ी समस्याएं है,,पशुओं में प्लास्टिक से हानि हो रही। , प्रदूषित वायु पानी में माइक्रो प्लास्टिक धीरे-धीरे हमारे खाने-पीने और सांस के जरिए हमारे शरीर में पहुंच रहे हैं।
सरकार प्लास्टिक के खिलाफ अभियान जरूर चलाती किंतु आम नागरिक इसे उस स्तर पर नहीं लेता। सामान्य तौर पर सरकार प्लास्टिक बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करती है, दुकानदारों और उपभोक्ताओं को दंड देने का काम करती है लेकिन प्लास्टिक उत्पादित करने वाले उद्योगों पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया जा सकता???
सामान्य सी बात है आम नागरिक सुविधा को महत्व देता है जिसके चलते प्लास्टिक का उपयोग रोक पाना मुश्किल सा लगता है किंतु प्लास्टिक के घातक प्रभाव को देखकर भी हम हमारी सुविधा की दृष्टि से आंखें मूंद लेते हैं,, ऐसे संकट में सभी को जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभानी चाहिए। निरंतर शोध और अध्ययनों की रिपोर्ट प्लास्टिक के उपयोग से शारीरिक हानि के साथ-साथ वातावरण की खराबी की तरफ भी इशारा करती है शासन सरकार का अपना काम है, जिम्मेदार नागरिक होने के नाते हम यह समझे कि हम प्लास्टिक का उपयोग नहीं करेंगे जहां सरकार दुकानदारों और आम नागरिकों पर प्लास्टिक को लेकर कार्रवाई करती है ऐसे में कानून बनाकर उत्पादन करने वाली इकाइयों को भी बंद कर देना चाहिए। जनहित में आवश्यक है हम प्लास्टिक का उपयोग बंद करें बंद न कर सके तो कम से काम करने की कोशिश करें जो हमारे और हमारे आने वाली पीढियां के लिए एक अच्छे वातावरण का निर्माण करेगा।
इनका कहना
मुख्य नगर पालिका अधिकारी श ईश्वर महाले ने बताया कि शासन के दिशा निर्देशों के पालन में प्लास्टिक को लेकर हमारे द्वारा समय-समय पर कार्रवाई की जाती रही है,, वहीं स्वच्छता अभियान के तहत प्लास्टिक का उपयोग न करने के लिए भी अपील लगातार जारी की जा रही,पोस्टर्स लगाए है अन्य राज्य की सीमा पर होने से प्लास्टिक को लेकर दिक्कत जरूर बनती है।