जैन संतों के साथ सिंगोली में हुई दुर्भाग्यपूर्ण व पीड़ादायक घटना अभा जैन पत्रकार संघ ने की निंदा

जैन संतों की सुरक्षा पर शासन प्रशासन नीति निर्धारण करे
राजेश नाहर, खेतिया
—— नीमच के समीप सिंगोली में जैन संतों के साथ हुई घटना की अभा जैन पत्रकार संघ ने कड़ी निन्दा करते हुए संतों की सुरक्षा की मांग की है।
अभा जैन पत्रकार संघ प्रदेश अध्यक्ष संदीप डाकोलिया व प्रदेश महासचिव शिरीष सकलेचा ने बताया कि संतों के साथ घटित यह घटना निंदनीय पीड़ादायक हैं।इस अवांछनीय घटना ने समस्त जैन समाज ही नहीं, बल्कि पूरे देश के धार्मिक व नैतिक मूल्यों को झकझोर कर रख दिया है।

जैन पत्रकार संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि यह केवल एक संप्रदाय पर नहीं, बल्कि हमारी भारतीय संस्कृति की सहिष्णुता, संयम और आध्यात्मिक गरिमा पर भी सीधा आघात है। जो असहनीय है।

जैन संत, जो अहिंसा, शांति, तप और संयम के प्रतीक होते हैं, सदैव समाज को नैतिकता व सदाचार की प्रेरणा देते आए हैं। ऐसे संतों के साथ इस प्रकार की हिंसक व अमानवीय घटना होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है।
डाकोलिया व सकलेचा के साथ संघ के प्रदेश संस्थापक अध्यक्ष संजय लोढ़ा,संरक्षकद्वय हिम्मत मेहता,ऋतुराज बुढ़ावन वाला,सलाहकार जवाहर डोसी, राजेश नाहर,उपाध्यक्ष अनिल नाहर,सचिव संदीप जैन, संयुक्त सचिव अरुण बुरड़, प्रदेश संगठन सचिव विमल कटारिया प्रचार सचिव, नेमीचंद कावड़िया,प्रदीप जैन,गौरव दुग्गड, कार्यसमिति डॉ सुनील चोपड़ा ,राजकुमार नाहर,मनोज भंडारी,सदस्य विशाल बाघमार, आदि ने इस कृत्य की कठोर शब्दों में भर्त्सना की हैं और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिए जाने की पुरजोर मांग की हैं।

जैन समाज सरकार से निम्नलिखित मांगें करते हैं। घटना की निष्पक्ष और त्वरित जांच तथा दोषियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून या अन्य कठोर धाराओं के तहत कार्रवाई की जाए।
भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए सभी राज्यों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
धार्मिक साधु-संतों की यात्रा व ठहराव को सुरक्षित बनाने हेतु एक विशेष सुरक्षा तंत्र विकसित किया जाए।
पीड़ित संतों की चिकित्सा, सुरक्षा और मानसिक संबल हेतु राज्य सरकार तत्काल आवश्यक कदम उठाए।

पूरे प्रदेश में जैन समाज की धार्मिक स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा हेतु एक स्थायी समिति गठित की जाए।

संघ ने कहा कि जैन समाज एकजुट होकर इस अन्याय के विरुद्ध खड़ा है। हम शांति और संवैधानिक मार्ग से अपनी आवाज़ उठाते रहेंगे और तब तक शांत नहीं बैठेंगे जब तक दोषियों को न्याय के कटघरे में नहीं लाया जाता।

“अहिंसा परमो धर्मः” सिर्फ एक सिद्धांत नहीं, यह हमारे जीवन का मूल है। अगर उसी पर हमला होगा, तो यह पूरी मानवता पर हमला होगा।

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Author: jtvbharat