
छकतला उमराली सोंडवा क्षेत्र में 60 प्रतिशत भगत लोग निवासरत है
क्या शराब का अवैध रूप से गुजरात में परिवहन हो रहा है……?
संघर्ष से सिद्धि की खास खबर
अलीराजपुर जिले के वर्ष 2025-26 के चार अलग अलग ग्रुप के ठेके हुए जिसमें हम आज नानपुर ग्रुप के ठेके की बात आपके सामने रख रहे है।
1.सोंडवा:-सोंडवा का शराब ठेका का आरक्षित मूल्य 06.51.22.368 था
2.छकतला:-छकतला का शराब ठेका का आरक्षित मूल्य 05.95.46.519 था
3.उमराली:-उमराली का शराब ठेका का आरक्षित मूल्य 04.95.62.495 था
4.नानपुर:-नानपुर दो दुकानों का शराब ठेका का आरक्षित मूल्य 07.18.43.526 था
नानपुर समूह की कुल 5 दुकानों का आरक्षित मूल्य 24,60,74,908 था और टेंडर 25 करोड़ 10 लाख में हुआ।
1.छकतला की वर्ष 2025 में अनुमानित जनसंख्या 4000 के लगभग होगी जिसमें 2025 की अनुमानित जनसंख्या वृद्धि दर 20 प्रतिशत के हिसाब से पुरुष 1800 महिला 1500 ओर बच्चे 700 हो सकते है यह एक मोटा मोटा अनुमान है जो जनगणना 2011 के आधार मानकर लिया है।
वैसे छकतला के वोटरों की कुल संख्या 2200 के लगभग पंचायत चुनाव के समय थी।
इस क्षेत्र में 60 प्रतिशत भगत लोग है जो शराब का सेवन नहीं करते है इसके अलावा बच्चे ओर शराब नहीं पीने वाले को छोड़कर शराब का सेवन करने वाले पुरुषों की संख्या एक अनुमान से 500 के लगभग हो सकती है।
शराब का ठेका 6 करोड़ में लिया उसमें 50 प्रतिशत कमीशन ठेकेदार का खर्च इत्यादि शामिल करते हुए 09 करोड़ होता है।
9÷12=75 लाख एक महीने का होता है याने एक माह में छकतला में शराब का सेवन करने वाले 75 लाख की शराब अनुमानित पीते है।
छकतला में अनुमानित 500 व्यक्ति जो शराब का सेवन करते है वह एक माह में 75 लाख की शराब का सेवन करते है इस हिसाब से एक दिन में 2 लाख 50 लाख से अधिक की शराब का सेवन करते होगे जो प्रति व्यक्ति एक दिन में 500 रुपए के लगभग होती है।
इसका मतलब एक व्यक्ति प्रतिदि औसतन 500 रुपया खर्च ठेके के हिसाब से आता है।
अलीराजपुर जिले के छकतला में महुआ,बोर,गुड इत्यादि की शराब आदिवासी लोग बनाते है वही ताड़ी की सीजन में जनवरी से मई तक ताड़ी झाड़ों से निकलती है उसके बाद मजदूरी हेतु पलायन भी करते है जो 4 से 5 माह बाद मार्च में घर लौटते है।
छकतला के 95 प्रतिशत लोग गरीबी की रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले परिवार की सूची में दर्ज होंगे।
कहने का मतलब इतना सब कुछ आंखों के सामने है तो फिर सवाल यह कि 9 करोड़ की शराब आखिर जाती कहा है।
पुराने प्रकरणों को देखे तो छकतला से गुजरात राज्य की सीमा जो 4 किलो मीटर के लगभग लगी हुई है ।
ठेकेदार को ठेके की राशि सरकार को भरना ही पड़ती है वही अन्य खर्च भी होते ही है। इन सबके लिए अवैध शराब परिवहन करना ठेकेदार की मजबूरी बन जाती है। जबकि अलीराजपुर आदिवासी बाहुल्य जिला प्रदेश में गरीब जिले में शुमार होकर गरीब आदिवासी लोग छकतला के जिनका जीवन यापन कृषि और मजदूरी पर आधारित ओर आधा समय मजदूरी के लिए जिले से बाहर रहते है वह 9 करोड़ की ठेके की शराब पी जाते यह असंभव बल्कि सत्य तो यह है कि ठेकेदार समीपस्थ गुजरात राज्य की सीमा ओर शराब बंदी का फायदा उठाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों के शराब ठेके के टेंडर करोड़ों में लेता ओर अवैध शराब परिवहन अपने गुर्गों के माध्यम से करता ही होगा जो पुलिस ओर आबकारी में पिछले वर्ष में दर्ज प्रकरण बता रहे है कि छकतला से गुजरात शराब परिवहन अवैध रूप से हो रही को पकड़ा भी है।
अब छकतला में किसी अन्य ने ठेका लिया है वह क्या करता है उसकी जानकारी निकल कर आएगी ही लेकिन अवैध शराब वर्तमान में चोरी छिपे हो रहा होगा उससे इंकार नहीं कर सकते क्योंकि महज़ 15 दिन में अलीराजपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में लाखो की अवैध शराब ओर वाहन सहित कुछ अभियुक्त को अलीराजपुर पुलिस ने पकडा वह अवैध शराब के काले साम्राज्य को उजागर कर रही है।