जिसके मन में जब तक राग द्वेष है, तब तक उसे ज्ञान की प्राप्ति नहीं होती – साध्वीश्री तत्वलताजी

मेघनगर (सौरभ खेमसरा )

परमात्मा को भी केवलज्ञान प्राप्त करने में 12.5 वर्ष का समय लगा, जिस व्यक्ति के जीवन में राग और द्वेष है, उसे कभी ज्ञान कि प्राप्ति हो ही नहीं सकती। राग और द्वेष को दूर करने का सबसे योग्य माध्यम है, अरिहंत परमात्मा की आराधना, क्योंकि अरिहंत परमात्मा वीतरागी है, समस्त प्रकार के राग, द्वेष, कषाय से मुक्त है, उनकी आराधना ही हमारा कल्याण कर सकती है। उक्त उद्गार पूज्य साध्वीजी श्री तत्वलताश्रीजी महाराज साहब ने आज मेघनगर में मंगल प्रवेश के अवसर पर व्यक्त किए।
पूज्य साध्वीजी अपना वर्ष 2024 का चातुर्मास मेघनगर में पूर्ण कर यहां से विहार कर पुण्य सम्राट गुरुदेव श्रीमद विजय जयंतसेन सुरीश्वरजी महाराज साहब के पट्टधर वर्तमान गच्छाधिपति श्रीमद विजय नित्यसेन सुरीश्वरजी महाराज साहब आदि विशाल साधु साध्वी भगवंत की निश्रा में सिद्धवड पालीताणा में आयोजित उपधान तप आराधना में पहुंचे यहां से विहार कर अहमदाबाद, गोधरा, झालोद, कुशलगढ़, थांदला होते हुए आज मेघनगर पधारे।
नगर प्रवेश पर समाजजनों ने पूज्यश्री का बाफना फाइबर्स से ढोल से मंगल प्रवेश करवाया। जहां से साईं चौराहा, दशहरा मैदान, शान्ति सुमतिनाथ मंदिर, आजाद चौक होते हुए ज्ञान मंदिर पहुंचे।
यहां से विहार कर आप झाबुआ होते हुए पारा पहुंचेंगे और फिर वहां से मोहनखेड़ा पहुंचेंगे जहां आपकी निश्रा में 14 से 21 मई तक कन्या शिविर का आयोजन भी होगा।

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Author: jtvbharat