नो माह पहले फुटकर व्यापारियों की रोजी-रोटी को ध्वस्त कर किसके संरक्षण में दुकानों का अवैध निर्माण हो रहा है

शिकायत पर किसके दबाव में अधिकारी झूठा निस्तारण दिखा रहे हैं….अधिकारी

शिकायतकर्ता ने तहसीलदार से लेकर एसडीएम तक न्याय की लगाई गुहार,_

शिकायतकर्ता ने सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई लेकिन कोई समाधान नहीं…
नितेश वर्मा मो 6265673435
उन्हेल:- प्रशासन किसके आगे इन दिनों इस कदर नतमस्तक है की वह कलेक्टर के आदेश नगर पालिका अधिनियम ओर धर्मस्व विभाग की जमीनों के लिए बनाए नियम आदेश के विपरीत काम करने को मजबूर हैं इस मजबूरी का कोई तो कारण बताओ …..!
9 माह पहले फुटकर व्यापारियों की रोजी-रोटी को ध्वस्त करने वाले इन आला अफसरों को तनिक अफसोस नहीं होता होगा कि हम किसके दबाव में आकर मात्र एक नोटिस के दायरे में एक आदमी रोज कम कर कैसे अपना घर खर्च चलता है और उसकी सजा समस्त परिवार को दी जाती है लेकिन मानवता से परे नगर प्रशासन का अंधा बुलडोजर उन राजनीतिक रसूखदारों के अवैध निर्माण होने पर तोड़ने में आखिर क्यों मजबूर हो जाता है जिसका अपराध भी 9 माह पहले फुटकर विक्रेता कि श्रेणी में आता हो वह अवैध निर्माण चल रहा है किसके संरक्षण में दुकानों का अवैध निर्माण हो रहा है क्या अतिक्रमण ओर जबरन कब्जा नहीं है…?
किसका दबाव है इन अधिकारियों को जो अवैध निर्माण के आगे नतमस्तक हो ना पड़ता है हम बात कर रहे हैं मदन मोहन ट्रस्ट मंदिर की जमीन पर अवैध निर्माण की जहां शिकायतों के बाद भी अवैध निर्माण को ध्वस्त करने कि बजाय प्रशासनिक अधिकारीगण जिलाधीश के आदेश के विपरीत काम करना पड़ रहा है।
इनकी क्या मजबूरी ऐसी की पत्राचार जारी करने के बावजूद कारवाही करने में नगर प्रशासनिक अधिकारीयों को किसके आदेश का इंतजार होता है

मामला है मंदिर भुमि ज़ोन 15 अंतर्गत से जुड़ा जहां अस्थाई बस स्टैंड पर दुकानों का अवैध निर्माण
अस्थाई बस स्टैंड में सत्ताधारी नेताओं द्वारा अवैध दुकान निर्माण कर हाथठेला वाले को गुमराह करने का काम किया जा रहा है अवैध निर्माण कार्य का संरक्षण प्रशासनिक अधिकारीयों कर रहे हैं जबकि इस भुमि पर अस्थाई बस स्टैंड जनहित में अनुमति ली गई थी बावजूद किसके सरंक्षण के बलबूते यह जिलाधीश के आदेश को नकारते हुए 24 अवैध दुकान निर्माण कर ली गई है नगर परिषद व तहसीलदार द्वारा कोई अनुमति नहीं दी गई है प्रशासनिक अधिकारियों का कहना भी है कि अवैध निर्माण है इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारीयों इसे ध्वस्त करने में नाकामयाब देखा जा रहा है । नगर परिषद से लेकर तहसीलदार एसडीएम आला अफसरों को यह दबाव है कि आखिर कैसे अपने बिना पूछे नोटिस जारी कर दिया इसी क्रम में शिकायतकर्ता ने भी सीएम हेल्पलाइन से लेकर जनसुनवाई सहित कोर्ट न्यायालय तक शिकायत की है लेकिन धरातल पर अवैध निर्माण जोरों शोरों से चल रहा है लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है इसी से साफ जाहिर होता है कि अफसरों पर किसी न किसी रसूखदार का दबाव है
1.जब इस संबंध में नागदा एसडीएम बृजेश सक्सेना से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि मैने जानकारी मंगवाई है उसके बाद ही कार्यवाही होगी।
2.नगर परिषद उन्हेल के सीएमओ कैलाश वर्मा से इस संबंध में जानकारी चाही तो उन्होंने बताया कि मुझसे जो जानकारी चाही गई थी वह बनाकर भेज दी है
3.नायाब तहसीलदार राम विलास वाक्टरीया से जानकारी चाही तो उन्होंने फोन रिसीव किया ओर बोले में अभी कार्यक्रम में हु आपसे में फिर बात करता हु बहुत देर बीत जाने के बाद दोबारा उनको फोन लगाया तो उन्होंने रिसीव नहीं किया इसका सीधा सा मतलब है वह इस अवैध निर्माण के प्रकरण से जानकारी न देकर बच रहे है

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Author: jtvbharat