प्रशासन बेखबर कॉलोनाइजर महानगरों की तरह कॉलोनी विकसित करने का करते हैं वादा प्लांट बिकने के बाद पलट कर भी नहीं देखते ,

*नगर में सिर्फ तीन कॉलोनी वैध प्रक्रिया में 30 से अधिक कॉलोनियों अवैध लेकिन कार्रवाई नोटिस तक सीमित रही,

नपं नहीं दे पा रही सुविधाएं, नागरिक शिकायती आवेदन पर आवेदन दे रहे हैं कार्रवाई नहीं,

नितेश वर्मा की खबर से उन्हेल
मो 6265673435

उन्हेल, क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों को लेकर नोटिस जारी किए और कई बार शिकायत भी हुई लेकिन कार्रवाई सिर्फ नोटिस तक ही सीमित रही ठोस कदम न उठाने के कारण यहां रहने वाले लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे इन कॉलोनियों की हालत गांवों से भी बदतर हो चुकी है कालोनियों रहवासियों का कहना है कि पीने के पानी सीवेज सड़क और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही है न तो कालोनाईजर कोई सुविधा दे रहे हैं और न हीं नगर परिषद ध्यान दे रही है नागरिक लगातार शिकायतें कर रहे हैं लेकिन कोई समाधान नहीं निकल रहा है।
सर्वे में अवैध कॉलोनियों की लंबी सूची
नगर में साल भर पहले अवैध कॉलोनियों को लेकर शिकायत पर राजस्व विभाग अधिकारियों के निर्देशानुसार क्षेत्र में बस रही अवैध कालोनियों को लेकर पटवारी द्वारा सर्वे कर लंबी सूची भी बनाई थी जिसमें लगभग 25 अवैध कॉलोनियों नगर में बसी हुई पाई गई थी और सूची बनाकर नागदा एसडीएम कार्यालय में भेजी गई थी जहां पर अवैध कॉलोनियों को लेकर नोटिस भी जारी किए थे लेकिन नोटिस के बाद कार्रवाई करना जिम्मेदार अधिकारी भूल गए और अवैध कालोनियों की फाइल नागदा कार्यालय में आज तक धूल खा रही है कार्रवाई नहीं होने से नगर में दिनों दिन अवैध कालोनियों की बसाहट हो रही है जहां इन अवैध कॉलोनियों में आम जनमानस को दलालों सर्व सुविधायुक्त के बड़े-बड़े सपने दिखाकर प्लांट को बेंच देते जहां आम आदमी इनकी बातों में आकर इन अवैध कॉलोनी में आशियाना खरीद लेते है और बाद में ठगा महसूस करता है
कृषि की भूमि पर बन रही है नगर में अवैध कॉलोनियों
नगर क्षेत्र में खेतों की जमीन पर बड़े पैमाने पर अवैध कालोनियां काटी जा रही है कॉलोनाइजरों के पास रेरा, डायवर्सन,टीएनसीपी और नगर परिषद की अनुमति नहीं है इसके बावजूद वे महानगरों जैसी सुविधाओं का लालच देकर लोगों को आकर्षित कर रहे हैं खेती की जमीन पर 60/40 के अनुबंध से प्लाटिंग की जा रही है,

वैध कालोनी बनाने की प्रक्रिया
किसी भी कॉलोनाइजर को कॉलोनी वैध करवाने के लिए सबसे पहले जमीन को सभी कानूनी बंधनों से मुक्त करना होता है इसके बाद एसडीओ के पास डायवर्सन के लिए आवेदन किया जाता है एसडीओ टीएनसीपी से अभिमत लेकर डायवर्सन की अनुमति देता है और फाइल टीएनसीपी को भेजता है सर्वे के बाद फाइनल मंजूरी मिलती है इसके बाद रेरा और नगर परिषद की अनुमति भी लेनी होती है जिससे नगर परिषद की आय में भी वृद्धि होती है लेकिन नगर में ऐसा नहीं हो रहा है

बुनियादी सुविधाओं का अभाव

नियमों के अनुसार कॉलोनाइजर को कॉलोनी के निर्माण के समय ही सड़क नाली स्ट्रीट लाइट पानी बगीचा और मंदिर जैसी सुविधा देनी होती है लेकिन अवैध कॉलोनी में कोई सुविधा नहीं है जो लोग यहां प्लाट खरीद रहे हैं उन्हें भविष्य में परेशानियों का सामना करना पड़ेगा पहले भी रहेवासियों ने विकास कार्यों के लिए अफसरों को शिकायत की है लेकिन नियमों के कारण अब तक कोई काम नहीं हो सका,
इनका कहना है
कुछ समय पहले नगर में बस रही अवैध कॉलोनियों को लेकर अभियान चलाया गया था जहां पटवारी द्वारा सर्वे कराया गया था जिसमें लगभग 25 अवैध कॉलोनियों मौजूद थी जिनकी सूची नागदा एसडीएम को भेजी थी वहां से अब तक कोई आदेश नहीं आए,
*रामविलास वाक्तलीया
* तहसीलदार उन्हेल

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Author: jtvbharat