अघोषित बिजली कटौति से आमजन त्रस्त

निजी से लेकर सरकारी तक सारे काम हो रहे प्रभावित
बिजली कंपनी का प्रशासन जानबूझकर दे रहा बड़े आंदोलन को दावत
संघर्ष से सिद्धि -संदीप राठौड़
डही
डही नगर व आसपास के एरिये में इन दिनों हो रही 8-10 घंटे की अघोषित विद्युत कटौति से जनता त्रस्त है। वहीं इससे लोगों के निजी काम तो प्रभावित हो ही रहे है, सरकारी काम भी बुरी तरह से प्रभावित हो रहे है। बिजली गुल हो जाने से सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा पसरा रहता है। वही बिजली कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी किसी तरह का समाधानकारक उत्तर देना तो दूर स्थानीय जनप्रतिनिधियों का फोन उठाना तक उचित नही समझ रहे है। इससे भी बढ़कर जुल्म तो तब हो जाता है जब लाईट के गुल होते ही बिजली कम्पनी के जिम्मेदार अधिकारियांे का मोबाईल भी गुल यानी बन्द हो जाता है।

नगरवासियो का कहना है कि बिजली कटौति की ऐसी दुर्दषा तो 15-20 साल पहले भी नही थी, क्योंकि उस समय बिजली कटोति की जरूर जाती थी, मगर उसकी विधिवत् घोषणा होती थी कि दिन में इतने समय बिजली बन्द रहेगी, मगर अभी जो कटौति हो रही है, उसने तो सारे रेकार्ड तोड़ दिये है।
दूसरी तरफ पिछले 7-8 सालों से बिजली प्रदाय की व्यवस्था में हुए सुधार के कारण लोगों ने अपने घरों में बिजली के वैकल्पिक उपकरण जैसे इन्वर्टर, इमरजेंसी लाईट आदि को चालू हालत में रखना छोड़ दिया था। मगर जैसी बिजली कटौति अभी चल रही है, उससे इन सब चीजों की जरूरत वापस पड़ने लगी है।

बात की जाए कुछ समय पहले की ही तो जब बिजली कंपनी के सुसारी वितरण केन्द्र पर कनिष्ट यंत्री सुभाष कुशवाह पदस्थ थे, उस समय जब भी लाईट बन्द की जाती थी या बन्द होती थी, चाहे थोड़े समय के लिए हो ज्यादा के लिए, उसका कारण और वापस बिजली चालू होने का अनुमानित समय एक व्हाट्सएप्प ग्रुप पर भेजा जाता था, जिससे लोग बेफिक्र हो जाते थे कि अब इतने समय के लिए लाईट नही रहेगी, मगर अब ये प्रथा जैसे मानो पूरी तरह से खत्म हो चुकी है, जिससे नागरिकों को असुविधा अधिक हो रही है। अब तो 7-7, 8-8 घंटे बिजली बन्द रखे जाने पर भी कोई मैसेज किसी व्हाट्सएप्प ग्रुप में या अन्य माध्यम से जनता तक नही पहूंचाया जाता है, जिससे इन दिनों बिजली कंपनी को लेकर आम जनों में आक्रोष व्याप्त है।

वहीं नगर संघर्ष समिति के सुत्रों की माने तो यदि जल्द ही इस लचर व्यवस्था में सुधार नही आता है तो शीघ्र ही नगरवासियों के द्वारा इस व्यवस्था के खिलाफ चरणबद्ध आन्दोलन किया जा सकता है।

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Author: jtvbharat