
3 दिवसीय शताब्दी महोत्सव हुआ प्रारम्भ
नरेश राठौड़
कुक्षी / पुण्यसम्राट गुरुदेव श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी महाराजा के शिष्य एवं वर्तमान गच्छाधिपति हृदयसम्राट श्रीमद विजय नित्यसेन सूरीश्वर जी म. सा. व आचार्य श्री जयरत्न सुरिश्वर जी म. सा. के आज्ञानुवर्ती मुनिराज श्री प्रत्यक्षरत्न विजय जी म सा व मुनिराज श्री पवित्ररत्न विजय जी म. सा. का कुक्षी नगर मे भव्य प्रवेश हुआ। दोनों मुनिराज श्री विहार आज प्रातः 5 बजे मधुकर विहार सेवा समिति के सदस्यों ने रामपुरा से 10km का विहार कर कुक्षी नगर मे प्रवेश करवाया । प्रवेश कचहरी चौक से प्रारम्भ हो कर महात्मा गाँधी मार्ग, सोनी मोहल्ला, धान मंडी, तिलक मार्ग होते हुवे पुनः महात्मा गाँधी मार्ग स्थित बड़े उपाश्रय मे प्रवेश का समापन हुआ सभी गुरु भक्तो मे अपने अपने घर के सामने मुनिराज श्री की गहुली की। दोनों साधु भगवंतो ने नगर के पांच जिन मंदिर के दर्शन किये पश्चात् बड़े उपाश्रय मे दादा गुरुदेव श्रीमद विजय राजेंद्र सूरि म. सा. के पाट के दर्शन किये दादा गुरुदेव का पाट सो वर्ष से भी प्राचीन है। बड़े उपाश्रय मे मुनिराज श्री का प्रवचन हुआ। मिडिया प्रभारी स्वस्तिक जैन ने बताया की मुनिराज श्री ने अपने प्रवचन मे कहा की जगत मे प्रसन्न करना हो तो जगतपति सद्गुरु एवं अपनी आत्मा को करो जगत पती एवं अपनी आत्मा को प्रसन्न करने हेतु गुरु ही श्रेष्ट आलमबन है अतः आपने गुरु एवं गुरु गच्छ है प्रति पूर्ण भाव से समर्पित रहे । पश्चात् श्री संघ द्वारा मुनिराज श्री पवित्ररत्न विजय जी म. सा. का दीक्षा दिवस पर शुभकामनायें अर्पित की गई। दोनों मुनिराज श्री की निश्रा मे श्री शान्तिनाथ जी के बड़े मंदिर के गंभारे मे परिक्रर स्थापना लाभार्थी परिवार द्वारा किया गया। सीमन्धर स्वामी मंदिर मे 3 दिवसीय शताब्दी महोत्सव पर प्रातः से मंदिर जी मे लाभार्थी परिवार द्वारा पक्षल, पूजा, आरती की गई। दोपहर मे महिला व बहु मण्डल की पूजा पढ़ाई गई । शाम को श्री संघ के साथ बड़े मंदिर से पाच जिन मंदिर दर्शन करते हुवे सीमन्धर स्वामी मंदिर मे लाभार्थी परिवार द्वारा आरती की गई।