क्या सस्ते है मानवीय प्राण ? या ढीली है प्रशासनिक कमान

जन चिकित्सालय परिसर में चार एम्बुलेंस की उपलब्धता के बाद भी ,नहीं आई पहुंएंबुलेंस, नतीजन नहीं बच सके यात्री के प्राण ।

जिला ब्यूरो मुकेश चतुर्वेदी

गंज बासौदा सोमवार रात्रि को ऑन ड्यूटी स्टेशन मास्टर उमेश यादव को सेक्शन कंट्रोलर, भोपाल से रात्रि ग्यारह बज कर दस मिनिट पर गाड़ी क्रमांक 14313 मुंबई बरेली साप्ताहिक एक्सप्रेस के कोच नंबर B2 के बर्थ क्रमांक 52 पर एक यात्री को अटैक की सूचना प्राप्त हुई। सूचना पर तत्काल कार्य करते हुए ड्यूटी पर मौजूद रेल कर्मियों ने तुरंत ही इसकी सूचना आरपीएफ , जीआरपी एवम् डायल 108 को दी गई। लेकिन डायल 108 पर
कई बार कॉल करने के पश्चात भी एम्बुलेंस का वेटिंग समय 30 मिनिट से अधिक बताया जाता रहा । 15 मिनिट तक डायल 108 से संतोषजनक जबाब न मिलते देख ऑन ड्यूटी प्वाइंस मेन प्रदीप अहिरवार ने सिग्नल विभाग ने कार्यरत एवम श्रमदान दल के सदस्य आकाश जैन एवम वरिष्ठ पत्रकार राजा छारी को दी। लेकिन तमाम प्रयासों के बाद भी जब एम्बुलेंस की अनुपलब्धता के बाद पीड़ित यात्री को निजी सवारी ऑटो से राजीव गांधी जन चिकित्सालय ले जाया । जहां ऑन ड्यूटी डॉक्टर द्वारा अटैक पीड़ित यात्री मुन्ना कुरेशी निवासी मुंबई को, जांच करने के पश्चात मृत घोषित किया।

तीन डायल 108 और एक निजी एम्बुलेंस मौजूद थी अस्पताल परिसर में,

गौर करने वाली है कि जब ऑटो द्वारा पीढ़ित व्यक्ति को लेकर जन चिकित्सालय पहुंचे तो वहां तीन डायल 108 और एक निजी एम्बुलेंस मौजूद थी। और एक अन्य एम्बुलेंस थोड़ी देर बाद एक किसी मरीज को लेकर चिकित्सालय पहुंची। लेकिन जब रेल कर्मचारियों द्वारा उनकी फोटो और वीडियो बनाना प्रारंभ किया तो एकाएक परिसर में खड़ी तीनों डायल 108 एम्बुलेंस परिसर से नदारद हो गई।

अब सवाल यह है कि तीन एम्बुलेंस की उपलब्धता के बाद भी डायल 108 पर एम्बुलेंस की अनुपलब्धता बताना और प्रतीक्षा समय 30 मिनिट से अधिक बताना डायल 108 पर सेवा पर कई प्रश्न पैदा करता है।

ऐसे में एक प्रश्न यह भी उठता है कि क्या इन एम्बुलेंस सेवा प्रदाताओं को शासन प्रशासन की डर समाप्त हो गया है या इन पर प्रशासनिक अधिकारियों की छत्र छाया है। या इनके लिए मानव जीवन की कोई कीमत नहीं है । ऐसे ओर भी प्रश्न उठना लाजिमी है । क्यों कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ इससे पूर्व दस दिन पहले 9 मार्च को भी आस्था स्पेशल में एक यात्री को अटैक की सूचना पर भी एम्बुलेंस नहीं पहुंची, और उससे पहले दो सितंबर 2023 को अंत्योदय एक्सप्रेस से गर्भवती महिला की सूचना पर भी एम्बुलेंस नहीं पहुंची दो ही स्थिति में सिग्नल विभाग के कर्मचारियों की तत्परता से सिग्नल विभाग के वाहन से पीढियों को अस्पताल पहुंचाया गया था जिसमे महिला को बचाया जा सका था दूसरा पीड़ित को बचाया नही जा सका।

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Author: jtvbharat