
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच के आदेश पर ज्ञानवापी की तरह धार स्थित भोजशाला का वैज्ञानिक सर्वे (ASI सर्वे) आज (शुक्रवार) को कड़ी सुरक्षा के बीच शुरू हो गया। दिल्ली और भोपाल के अफसरों की सर्वे टीम सुबह 6 बजे भोजशाला परिसर में पहुंची। टीम ने भवन का निरीक्षण किया। दोपहर में नमाज से पहले सर्वे टीम भोजशाला परिसर से बाहर आ गई। अब दूसरे चरण का सर्वे शनिवार को होगा। इधर, मुस्लिम पक्ष की सर्वे पर रोक लगाने संबंधी याचिका पर अर्जेंट हियरिंग वाली मांग सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी।
पुराना है भोजशाला का विवाद
बता दें कि भोजशाला का विवाद कई वर्षों पुराना है. क्योंकि हिंदू धर्म के लोग इसे सरस्वती का मंदिर बताते हैं और पूजा अर्चना करते हैं. वहीं, मुस्लिम समाज इसे कमाल मोला की मस्जिद बताकर नमाज अदा करता है. बताया जाता है कि, अंग्रेजों के शासनकाल में भी भोजशाला को लेकर विवाद का मुद्दा उठा था. तब उस समय लाॅर्ड कर्जन धार और मांडू के दौरे पर आए थे और उन्होंने भोजशाला के रखरखाव के लिए 50 हजार रुपये खर्च करने की मंजूरी दी थी, तब सर्वे भी किया गया था. 1951 में धार भोजशाला को राष्ट्रीय स्मारक घोषित किया गया. उस समय जारी हुए नोटिफिकेशन में भोजशाला और कमाल मौला की मस्जिद का उल्लेख है.
ज्ञानवापी की तर्ज पर होगा सर्वे
हाल ही में हिंदू संगठन के द्वारा लगाई गई याचिका में भोजशाला का सर्वे कराकर उचित निराकरण की मांग की गई थी. उसी क्रम में हाई कोर्ट के निर्देश के बाद शुक्रवार की अल सुबह धार की ऐतिहासिक भोजशाला में सर्वे करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का दल पहुंचा और टीम ने अंदर प्रवेश किया. हालांकि मीडिया को फिलहाल अंदर आने की इजाजत नहीं दी गई है.