कुक्षी में गणगौर नृत्य की सतरंगी छटा ने मोहा सबका मन

200 सामूहिक गणगौर रथो के साथ सीरवी समाज की महिलाओं ने किया आकर्षक गणगौर नृत्य

कुक्षी। गणगौर महोत्सव के दौरान पंचमी शनिवार शाम को जवाहर चौक में ऐसा लगा जैसे झील मिलाते हुए चांद सितारे आसमान से जमीन पर उतर आए हो।सांझ ढलते ही क्षत्रिय सीरवी समाज द्वारा विशेष एवं मनमोहक रूप से श्रृंगारित200 से अधिक गणगौर माताजी एवं राजा ईश्वर जी के रथ का चल समारोह श्री आई माता मंदिर से शुरू होकर जवाहर चौक पर आगमन हुआ। सराफा बाजार से लेकर जवाहर चौक तथा आसपास के भवन श्रद्धालुओं की भीड़ से खचाखच भरे हुए थे। नगर का हृदय स्थल जवाहर चौक में एक साथ 205 गणगौर माता ओर ईश्वर रथो का विशेष गणगौर नृत्य हुआ । गणगौर नृत्य के दौरान हिंदू सनातन लोक संस्कृति एवं परंपरा की अनुपम छटा दिखाई दी।कुक्षी का गणगौर नृत्य पूरे मालवा निमाड़ के साथ पूरे मध्य प्रदेश में माना जाता है जैसे ही 4 ढोल की थाप पर आकर्षक गणगौर नृत्य शुरू हुआ लोग अपने मोबाइल की फ्लैश लाइट चालू कर इन पलों को अपने मोबाइल के कमरे में कैद करते तथा नृत्य को निहारते रहे।परम्परा अनुसार माता के रथ की बदाई श्री आईजी द्वार स्थित माधव श्री प्रसादम में किया गया। निमाड़ के पारंपरिक लोक पर्व गणगौर की नगर में विशेष घूम रही।सभी समाज वर्ग ने आस्था के इस पर्व को श्रद्धा पूर्वक मनाया। महिलाओं द्वारा गणगौर गीत गाकर तंबोल की प्रसाद वितरण की गई।
जवाहर चौक को दुल्हन की तरह सजाया गया: कुक्षी शहर में बसे सिर्वी समाज तथा परगना के सीरवी बाहुल्य 25 गावो में गणगौर पर्व की विशेष धूम रही। शहर के जवाहर चौक से लेकर सुतार मोहल्ला कॉर्नर, प्रसिद्ध श्री आई माता चौक, बड़ी हताई, छोटी हताई,राम चौक,नयापुरा आदि जगह विशेष साज- सज्जा की गई।
किसान व मजदूर खेती छोड़कर महापर्व की रंगत में डूबे: गणगौर पर्व के दौरान किसान व मजदूर वर्ग अपने दैनिक कृषि एवं मजदूरी तथा अन्य काम धंधे तीन दिन बंद रखकर आस्था के इस पर्व में श्रद्धा भाव से डूबे रहे। रात्रि में सीरवी समाज द्वारा श्री आई माता मंदिर, बड़ी हताई व छोटी हताई में पारंपरिक नृत्य के साथ रतजगा किया गया गणगौर महोत्सव की रंगत को देखने के लिए कुक्षी तहसील के विभिन्न ग्रामों से श्रद्धालुओं का तांता नगर में लग रहा।गणगौर पर्व का सीरवी बहुल ग्रामों में तो पारंपरिक मनाने पर वहां इस महापर्व की रंगत रही परंतु तहसील के अधिकांश ग्रामों में विभिन्न समुदाय के लोग इस पर्व की रंगत निहारने से वंचित नहीं रहे यही वजह रही की ग्रामीण क्षेत्रो का हुजूम भी गणगौर नृत्य को देखने शहर में उमड़ पड़ा। क्षत्रिय सीरवी समाज के नगर अध्यक्ष कांतिलाल गेहलोत, सकल पंच कैलाश काग, मोतीजी काग, राजेश भायल, बाबूलाल हम्मड, कोटवाल रमेश परिहार पंच राजेश राठौर के अलावा समाज के पूर्व पंच समिति सभी ग्रुप एवं समितियों के सदस्य,महिला संगठन, वरिष्ठजन, युवा, महिलाएं एवं बुजुर्ग उपस्थित रहे।
मटकी नाच रहा आकर्षण का केंद्र: सीरवी समाज गणगौर पर्व के तीन दिनों में रात्रि जागरण में पारंपरिक राजस्थानी मटकी नृत्य, ताली सो नृत्य का नाच किया जाता है। जो लोगों को खूब भाता है खासकर मटकी नृत्य विशेष अंदाज किया जाता है इस नृत्य में महिला अपने सिर पर मिट्टी की मटकी रखकर नृत्य करते हुए पुरुष को अंगूठे बताते हुए कहती है मटकी को फोड़ के बताओ सामने पुरुष भी एक हाथ में रुमाल लेकर नृत्य करते हुए मटकी फोड़ने का प्रयास करता है जो कभी-कभी सफल और कभी असफल हो जाता है यह नृत्य बडा ही आकर्षक लगता है।

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Author: jtvbharat