
जिला ब्यूरो चीफ रेखा लहासे
बुरहानपुर वर्तमान में चारों और शिक्षा का विस्फोट हो रहा है। सभी बच्चे पढ़-लिख कर अच्छी नौकरी करना चाहते हैं। जिसके कारण देश में नौकरियों का अकाल पड़ रहा है और सरकार के सामने भी भयानक स्थिति खड़ी हो रही है। आजकल विद्यार्थी किसी भी तरह कोई भी रास्ता अपना कर कैसे भी अधिक से अधिक अंक प्राप्त करना चाहते हैं। जिसके कारण वे सच्चा ज्ञान अर्जित नहीं कर पाते। आजकल हम ज्ञान के बजाय जानकारी बटोर रहे हैं जिसके कारण भी समस्या उत्पन्न हो रही है। आज इतनी बेकार सिखाई जा रही है कि विद्यार्थी आक्रामक होता जा रहा है। यही कारण है कि वह शस्त्र उठाने लगे हैं। समाज में हिंसा का बोलबाला हो रहा है। ज्ञान के लिए जो जानकारी उसे मिल रही है वह चर्चा के लिए तो ठीक है किंतु रोजगार के लिए नहीं। रोजगार न मिलने के कारण बहुत से छात्र एवं छात्राएं घोर अवसाद का शिकार हो रहे हैं और कभी-कभी अवसाद इतना बढ़ जाता है कि वे आत्महत्या तक कर लेते हैं। आजकल हर युवा किसी न किसी अवसाद से पीड़ित है। विद्यालयों के लिए यह आवश्यक है कि वे बच्चों को सही दिशा दिखाएं और उन्हें जीवन का वास्तविक मूल्य बताएं।
आजकल जिस प्रकार की समझाईश विद्यालयों में दी जा रही है उसका जीवन के साथ सरोकार नहीं दिखता है। यही कारण है कि थोड़ी सी विपरीत परिस्थिति आने पर विद्यार्थी क्या करे उसे सूझता नहीं है। जिस प्रकार तैरना सीखना हो तो पानी में उतरना पड़ता है, ठीक उसी प्रकार पहले विद्यार्थी को पानी से जुड़ना होगा। फिर उसे तैरने की कला सीखनी होगी। किंतु आजकल पानी से जुड़े बिना हवा में सारी बातें होती हैं। संस्कृति और परंपराओं से जुड़े बिना विद्यार्थियों को खोखली शिक्षा दी जा रही है।
शिक्षा का मूल धर्म आध्यात्मिक विकास भी होना चाहिए परंतु यह सब न सिखाते हुए विद्यालय केवल धन कैसे अर्जित करना है यही सीखा रहे हैं। वर्तमान स्तिथि का एक महत्वपूर्ण कारण माता-पिता भी हैं। वे अपने पाल्य की हर जरूरतों को समय पर पूरा करना उनका लाड़ मानते हैं, जिसके परिणामस्वरूप वही पाल्य अपने माता-पिता का आदर करना भूल जाता है। आजकल पालकगण विद्यालय पर ही विद्यार्थी के पक्ष में उमड़ पड़ते हैं, जिसका प्रभाव सकारात्मक नहीं आता है और पाल्य नकारात्मक ऊर्जा से घिर जाता है। पालकों और विद्यालय को समय रहते वर्तमान शिक्षा पद्धति के दोष को मिटाना ही होगा, अन्यथा भविष्य में इसके बहुत से दुष्परिणाम देखने को मिलेंगे।