
यज्ञ की परिक्रमा करने देर रात तक पहुंचे श्रद्धालु
विशाल भंडारे में एक लाख से ज्यादा श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे
मुकेश चतुर्वेदी
गंजबासौदा। वेत्रवती घाट स्थित नौलखी आश्रम पर चल रहे विराट प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित हुए श्री सीताराम अति महायज्ञ का शुक्रवार को पूर्णाहुति के साथ समापन हो गया। 10 दिवसीय से इस महायज्ञ में प्रारंभ से लेकर यज्ञ की पूर्णाहुति तक 11 लाख वेद मंत्रों की आहुतियां यज्ञ नारायण भगवान को समर्पित की गईं। महंत राम मनोहर दास महाराज, बनारस से आए प्रतिष्ठाचार्य पं मथुरा प्रसाद, उप प्रतिष्ठाचार्य पं केशव शास्त्री, महायज्ञ के मुख्य यजमान उद्योगपति राकेश मरखेड़कर सहित अन्य संत भी पूर्णाहुति में सम्मिलित हुए। यज्ञ की परिक्रमा के लिए देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। महायज्ञ की पूर्णाहुति पर शनिवार को कथा स्थल पर विशाल भंडारे का आयोजन रखा गया है जो प्रातः 10 बजे से प्रारंभ होकर देर रात तक चलता रहेगा। भंडारे के कारण शनिवार को कृषि उपज मंडी में नीलामी का अवकाश घोषित किया गया है।
मालूम हो कि क्षेत्र के तपस्वी संत साकेतवासी बाबा जगन्नाथ दास जी महाराज की तपोस्थली नौलखी आश्रम के करीब 90 साल बाद आश्रम के महंत राम मनोहर दास जी महाराज के मार्गदर्शन और सानिध्य में पुनर्निर्माण के मौके पर महाप्रभु जगन्नाथ भगवान, सीताराम दरबार सहित अन्य देव प्रतिमाओं की विराट प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव 33 कुंडिय श्री सीताराम महायज्ञ के साथ जगन्नाथपुरी, बनारस,अयोध्या, वृंदावन से आए विद्वान ब्राह्मणों के साथ-साथ स्थानीय ब्राह्मणों ने भी के द्वारा प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई।
यज्ञ की दिव्यता,भव्यता और विराटता का साक्षी बन गया नौलखी
विराट प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के आयोजन की श्रृंखला के दौरान ऐसे अवसर जुड़ गए जो वर्षों तक याद किए जाएंगे। आश्रम में पहले से ही मौजूद बरसों पुराने भगवान जगन्नाथ महाप्रभु के विग्रहों को बदलकर जगन्नाथपुरी की वैदिक परंपरानुसार नवीन विग्रहों के अलावा भगवान सीताराम दरबार के साथ अन्य देव प्रतिमाओं,सुदर्शन चक्र की स्थापना की गई। क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा,धन-धान्य की संपन्नता के लिए यज्ञशाला के पास अलग-अलग विद्वान ब्राह्मणों द्वारा चार वेद और 18 पुराणों का एक साथ वचन किया गया। भंडार गृह में 24 घंटे अखंड अन्नपूर्णा स्तोत्र का पाठ, गणेश जप, नारायण जप,विष्णु सहस्त्रनाम का जप, राम मंत्र का जाप एक साथ वाचन यज्ञ के दौरान संपन्न हुआ है। नगर में पहली बार वाल्मीकि रामायण की कथा अयोध्या से पधारे वक्त रामानुजाचार्य जगतगुरु स्वामी रत्नेश जी महाराज द्वारा की गई। कथा को सुनने के लिए प्रतिदिन आयोजन स्थल पर हजारों की संख्या धर्मालुओं की उमड़ती रही। यज्ञ के दौरान भोजन निर्माण सहित वितरण व्यवस्था में अनुशासन के साथ-साथ सात्विकता देखने मिली। चित्रकूट से आए 12 संतों की टोलियां ने यज्ञ में बैठे यजमान,ब्राह्मण और संतों के लिए भोजन प्रसादी तैयार की।
कथा स्थल पर महायज्ञ की पूर्णाहुति का विशाल भंडारा आज
शुक्रवार को महायज्ञ की पूर्णाहुति के बाद शनिवार को कथा स्थल पर विशाल भंडारे का आयोजन रखा गया है जो सुबह 10 बजे से प्रारंभ हो जाएगा। भंडारे में 1 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को प्रसादी ग्रहण करने का लक्ष्य रखा गया है इसके लिए दो दिन से भंडार सामग्री तैयार कराई जा रही है ताकि अधिक से अधिक लोगों को प्रसादी मिल सके।