
बुद्ध पूर्णिमा विशेष
जिला ब्यूरो चीफ रेखा लहासे
बुरहानपुर । 23 मई बौद्ध पूर्णिमा के दिन जिले के विभिन्न बौद्ध विहारों पर समाजजनों ने हर्षोल्लाह से भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके बुद्ध जयंती मनाई। जिले के मोहम्मदपुरा ग्राम में पिछले एक सप्ताह से विशेष शिविर का आयोजन किया जा रहा था जिसका समापन बौद्ध पूर्णिमा के दिन किया गया। समापन अवसर पर राजस्थान से पधारे बौद्ध भिक्षु भंते अश्वजीत ने समाजजनों को संबोधित करते हुए बताया बौद्ध पूर्णिमा (जिसे बुद्ध जयंती के रूप में भी जाना जाता है) बौद्ध धर्म के संस्थापक सिद्धार्थ गौतम के जन्म का उत्सव है। बौद्ध परम्परा और पुरातात्विक खोजों के आधार पर कहा जाता है कि गौतम बुद्ध का जन्म 563 और 483 ईसा पूर्व के बीच नेपाल के लुम्बिनी में हुआ था। उनकी मां, रानी माया देवी ने अपने पैतृक घर की यात्रा के दौरान उन्हें जन्म दिया जबकि उनके पिता राजा शुद्धोधन थे। मायादेवी मंदिर, इसके आसपास के उद्यान और 249 ईसा पूर्व का अशोक स्तंभ, लुम्बिनी में बुद्ध के जन्म स्थल का प्रतीक है।
भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर बौद्ध अनुयायियों को शुभकामनाएं देते हुए बुरहानपुर मज़दूर यूनियन अध्यक्ष ठाकुर प्रियांक सिंह ने कहा हम सबको भगवान बुद्ध के आदर्शों पर चलकर सामाजिक परिवर्तन लाने का प्रयास करना चाहिए। अलग-अलग धर्मों को मानने वालों के बीच मतभेद या टकराव कदापि नहीं होना चाहिए।
ठाकुर प्रियांक सिंह ने आगे कहा भगवान बुद्ध के पदचिन्हों पर चलकर जाति-भेद, हिंसक मनोवृत्ति, द्वेष को जीवन से त्यागने की प्रतिज्ञा आज हम सबको लेना चाहिए इसके साथ-साथ सत्य, अहिंसा, भाईचारा एवं मानवता का भाव संपूर्ण विश्व में फैलाकर भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए महती भूमिका सभी की होनी चाहिए।बुद्ध पूर्णिमा क्यों मनाई जाती है ?बुद्ध पूर्णिमा जिसे वैशाख पूर्णिमा या भगवान बुद्ध जयंती के नाम से भी जाना जाता है। बौद्ध धर्म के संस्थापक गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और मृत्यु या परिनिर्वाण का स्मरण करती है। यह दिन विश्व भर के बौद्ध धर्मावलंबियों के लिए चिंतन, ध्यान और दयालुता के कार्यों के दिन के रूप में विशेष महत्त्व रखता है।
इस दिन बुद्ध के जीवन और शिक्षाओं का बोध किया जाता है तथा करुणा अहिंसा और सजगता के सिद्धांतों पर जोर दिया जाता है। इस दिन अनुयायी प्रार्थना करना और उदारता का अभ्यास करना जैसे अनुष्ठान करते हैं। बुद्ध पूर्णिमा बुद्ध द्वारा प्रदान की गई शाश्वत बुद्धि और ज्ञान की याद दिलाती है तथा भक्तों को आंतरिक शांति और आध्यात्मिक जागृति के लिए प्रयास करने के लिए प्रेरित करती है। भारत के साथ-साथ थाईलैंड, तिब्बत, चीन, कोरिया, लाओस, वियतनाम, मंगोलिया, कंबोडिया और इंडोनेशिया सहित कई दक्षिण पूर्व एशियाई देश साथ ही श्रीलंका, नेपाल, भूटान और तिब्बत भी इस दिन को बड़े हर्ष और खुशी के साथ मनाते हैं।