प्रशासनिक छीछालेदर और काँग्रेस नेता भानुप्रताप सिंह राठौड़ का आरोप —

समन्वय की कमी से जिले की छवि और प्रगति की सम्भावनाओं को लग रहा आघात
** राज्य सरकार के दो विभागों के बीच उजागर समन्वय के घोर अभाव से सीपीएस प्लांट निर्माण बना तमाशा
** समन्वय की कमी से ही अटकी है बंगला – बगीचा समस्या , बघाना रेल्वे ओव्हर ब्रिज , प्रमुख सड़क मार्ग और हवाई परिवहन सुविधा
नीमच , 03 जून , ( नप्र ) । नीमच जिला युवा काँग्रेस अध्यक्ष भानुप्रताप सिंह राठौड़ ने यहां जारी बयान में तथ्यात्मक आरोप लगाया है कि जिले में सरकारी विभागों और निर्वाचित जन प्रतिनिधियों के बीच समन्वय का घोर अभाव रहने से जिले से सम्बद्ध अनेकानेक महत्वपूर्ण विकास योजनाएं या तो अधर में लटकी है अथवा अभी तक स्वीकृत ही नहीं हो पा रही है । दोनों ही स्थितियों में खामियाजा जिले को भुगतान पड़ रहा है ।
श्री राठौड़ ने कहा कि , जिले की जावद तहसील के ग्राम जनकपुर क्षेत्र में सीपीएस प्लांट के लिए आवंटित भूमि के स्वत्व एवं आधिपत्य को लेकर जिस तरह राज्य सरकार के राजस्व और वन विभाग के बीच आरोप – प्रत्यारोपों की खुली जंग छिड़ी है उससे एक बार फिर से महत्वपूर्ण योजनाओं को लेकर प्रशासनिक विभागों और सम्बद्ध क्षेत्रों में निर्वाचित जन – प्रतिनिधियों के बीच जरूरी समन्वय और पूर्व तैयारियों की घोर कमी तथा गैर जिम्मेदारी सामने आई है ।
यह सर्व ज्ञात है कि अफ़ीम के डोडो से सीधे सेमी रिफाइन मार्फिन निकालने हेतु देश में पहली बार प्रायवेट सेक्टर को लायसेंस दिया गया है और इस प्रयोजन के लिए प्लांट स्थापना के लिए जनवरी 2024 में राज्य सरकार ने मप्र औद्योगिक विकास कॉर्पोरेशन लिमिटेड के माध्यम से 18.020 हेक्टेयर भूमि आवंटित की थी जिस पर निर्माण कार्य प्रगति पर है ।
श्री राठौड़ ने कहा कि , जिले को मिला यह बहुत महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है और यह जरूरी था कि निर्वाचित जन – प्रतिनिधि एवं प्रशासनिक विभाग बेहतर समन्वय और सजगता से इस बारे में हर कदम उठाते और निर्बाध रूप से क्रियान्वयन सुनिश्चित करते ताकि औद्योगिक प्रगति के लिए जिले में अनुकूलता का अच्छा संदेश प्रसारित होता और अन्य प्रोजेक्ट के लिए मार्ग प्रशस्त होता ।
— लेकिन अफसोसजनक बात यह है कि जिले के राजस्व और वन विभाग ने भूमि आवंटन को लेकर समन्वय नहीं दिखाया और अब भूमि के स्वत्व , अधिपत्य एवं आवंटन को लेकर आमने – सामने खड़े हो गए हैं । प्रोजेक्ट के बारे में क्षेत्र के निर्वाचित जन प्रतिनिधि श्रेय तो लेते रहें लेकिन विवाद रहित माहौल बनाने में कोई सहयोग और ध्यान नही दिया ।
श्री राठौड़ ने कहा कि , जिस तरह दोनों विभागों के बड़े अधिकारी सार्वजनिक रूप से खुल कर एक दूसरे पर प्रश्नाधीन भूमि सम्बन्धी दस्तावेजों में हेरफेर के संगीन आरोप लगा रहे हैं यह शर्मनाक है और यह जाहिर होता है कि स्वैच्छाचारिता किस हद तक पसरी हुई है । इस प्रकरण में देर – सवेर ठीक – ठाक कर लिया जाएगा लेकिन इस छीछालेदर से जिले की छवि को गहरा आघात लगा है । अगर समय रहते आपसी तालमेल पर ध्यान दिया जाता तो इस अपमानजनक स्थिति से बचा जा सकता था ।
श्री राठौड़ ने कहा कि जिले में सरकारी विभागों और निर्वाचित नेताओं के बीच समन्वय और सहयोग की भारी कमी के चलते अनेकानेक महत्वपूर्ण कार्य योजनाएं या तो अधर में लटकी हुई है अथवा मंजूरी नहीं मिल पा रही है । समन्वय की कमी से कई स्वीकृत योजनाओं पर क्रियान्वयन भी तमाशा एवं परेशानी का बड़ा कारण बन गया है । इसका सबसे बड़ा उदाहरण जिला मुख्यालय की बंगला – बगीचा समस्या सम्बन्धी असंगत व्यवस्थापन नियमों में सर्वहितकारी संशोधन का सालों से लंबित मामला है ।
श्री राठौड़ ने कहा कि , नपा प्रशासन , निर्वाचित नेता , स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार के सम्बद्ध अन्य विभागों के बीच हजारों परिवारों को प्रभावित कर रहे इस मामले में समन्वय नहीं होने से जन – अपेक्षानुसार संशोधन नहीं हो पा रहे हैं और प्रभावित लोगों का दमन , शोषण और भ्रष्टाचार जारी है । सरकारी विभागों में समन्वय की भारी कमी के कारण ही हजारों लोगों की परेशानी के समाधान हेतु बघाना रेल्वे फाटक पर प्रस्तावित ओव्हर ब्रिज निर्माण , भाटखेड़ा से डुंगलावदा तक फोरलेन मार्ग और कोटा – बांसवाड़ा व्हाया जीरन सड़क मार्ग स्वीकृति के बावजूद अधर में लटके हुए है ।
श्री राठौड़ ने कहा कि , प्रशासनिक विभागों और निर्वाचित नेताओं के बीच सकारात्मक समन्वय और इच्छा शक्ति के कमी के कारण केंद्र द्वारा घोषित योजना के बावजूद नीमच को हवाई परिवहन से जोड़ने के लिए उड़ान योजना , जिले की नदियों के विकास हेतु नमामि गंगे और धार्मिक एवं महत्वशाली अन्य स्थानों के समग्र विकास की स्वदेश दर्शन योजना का लाभ आज तक जिले को नहीं मिल पा रहा है ।

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Author: jtvbharat