सफलता की कहानी पशुपालन से आय हुई दोगुनी

स्वयं सहायता समूह से जुड़कर डॉली परमार के जीवन में आया आर्थिक परिवर्तन
जिला ब्यूरो
झाबुआ 07 सितम्बर, 2024:- यह कहानी है झाबुआ जिले के पेटलावद ब्लॉक के मठमठ गाँव की है। यह गाँव पेटलावद से 25 किलोमीटर दूर है। इसी गांव में आठ सदस्यीय परिवार में रहती है दीदी डॉली परमार और यह उनकी समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता को पाने की कहानी हैं।

समूह से जुड़ने के बाद जीवन में आये परिवर्तन और कार्य की वर्तमान स्थिति:-
दीदी के द्वारा बताया गया कि मैं साल 2015 में समूह से जुडी थी तब समूह से छोटे-छोटे ऋण कुल 27 बार ले चुकी हूँ। लेकिन शुरुआत में कोई कमाई का साधन नहीं लिया। घर के खर्चो में ही उपयोग किया, फिर एक दिन मै ग्राम संगठन मठमठ की बैठक में गई, आजीविका बढाने के लिए अलग-अलग तरह की आजीविकाओ पर बात हो रही थी। उसको सुना और फिर घर आकर मेरे पति, सास-ससुर से चर्चा की, फिर मेरे द्वारा समूह से ऋण लेकर 1 भेंस खरीदी जिससे मेरे परिवार में मासिक 3000 रूपए की आय आना शुरू हो गई। इस प्रकार मेरे द्वारा 4 बार ऋण कुल 2,30,000 रूपए का ऋण लेकर 5 भेंस खरीद ली। जिससे आज मेरे परिवार की आय मासिक 12000 रूपए है जो सालाना 144000 आय पशुपालन से होती है।
इसके साथ ही मैं बकरीपालन और छोटे स्तर पर मुर्गीपालन भी कर रही हूँ। मेरे पास 7 बीघा जमीन है जिसमें से 2 बीघा में भेंस पालन के लिए उपयोग करती हूँ और साथ में खेती भी करती हूँ। डॉली दीदी उदाहरण है आत्मनिर्भरता का , आज वह सम्मान पूर्वक अपना जीवन जी रही है , वह अपना और अपने परिवार की आजीविका चला रही है।

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Author: jtvbharat