14 सितंबर हिंदी दिवस पर __नई शिक्षा नीति में मातृभाषा का वर्चस्व

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 में यह नीति 34 वर्ष की प्रतीक्षा के बाद आई जो 21 वीं सदी की पहली शिक्षा नीति है। यह स्पष्ट है एनईपी 2020 एक ऐसा दस्तावेज है, जिसका देश के शैक्षणिक परिदृश्य पर दूरगामी परिणाम में नई दिशा मिलना प्रारंभ हो गई है। इससे विश्व में इसकी प्रतिष्ठा बढ़ने लगी है। यहां प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्रजी मोदी ने अपने एक ट्वीट में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के सम्बंध में लिखा था ‘‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति से प्रेरणा लेते हुए अब सभी तकनीकी शिक्षा के विषयों को मातृभाषा में पढ़ाने की कोशिश की जाएगी, इंजीनियरिंग व चिकित्सा सहित और अब मध्यप्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार एवं ऐतिहासिक पहल कर एम.बी.बी.एस. हिन्दी माध्यम में आरंभ करने वाला देश का पहला राज्य होने जा रहा है। इस शैक्षणिक अनुष्ठान में शासन की मंशा, योग्य शिक्षाविद्ांे का परिश्रम व प्रधानमंत्रीजी का स्वप्न साकार होने जा रहा है तो हम अभूतपूर्व पहल पर वैश्विक परिदृश्य में स्वागत के साथ-साथ गंभीर चिंतन अवश्य होगा।
मोदीजी ने क्षेत्रीय भाषाओं में मेडिकल और इंजीनियरिंग की शिक्षा उपलब्ध कराने का आव्हान किया था। इस संकल्प को मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार ने पूरा किया। 16 अक्टूंबर को भोपाल के लाल परेड मैदान में एम.बी.बी.एस. प्रथम वर्ष की एनाटामी, फिलियोलाजी और बायोकेमेस्ट्री की हिन्दी पुस्तकों का विमोचन किया। जो 97 डाक्टरों की टीम ने चार महीने में पुस्तक तैयार कर दी गई अब द्वितीय वर्ष एम.बी.बी.एस. की हिन्दी पुस्तकें बनाने का कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। जेईई नीट यूजी की परीक्षा 12 भाषाओं में देने की व्यवस्था भी की गई। केन्द्रीय गृहमंत्री अमीतजी शाह ने कहा कि ’’किसी भी व्यक्ति की सोचने की प्रक्रिया मातृभाषा में ही होती है।‘‘ इसी कारण नेल्सन मंडेला ने कहा था कि ‘‘अगर आप किसी से उसकी मातृभाषा में बात करते हो तो वह बात उसके दिमाग में नही दिल में पंहुचती है।’’ दुनियाभर में शिक्षाविदों ने मातृभाषा में शिक्षा पर जोर दिया है। अगर पढ़ाई और अनुसंधान मातृभाषा में हो तो भारत के विद्यार्थी पूरे विश्व में भारत का डंका बजाऐंगे।
म.प्र. के कई विद्यार्थी पढ़ाई करने मेडिकल एवं इंजीनियरिंग कालेज में पहुंच तो जाते थे लेकिन अंग्रेजी के कारण वे ढंग से पढ़ाई नहीं कर सकते थे। कुछ विद्यार्थी तो पढ़ाई बीच में ही छोड़ देते थे। पिछड़े, दलित, गरीब वर्ग के विद्यार्थी भाषा को लेकर हीन भावना से ग्रस्त हो जाते थे। अब वे हिन्दी में पढ़ाई कर अपनी क्षमता का पूरा विकास कर सकेंगे।
विश्व में चीन, जापान, फ्रांस, रूस, जर्मनी जैसे विकसित देशों ने अपनी भाषा में ही शिक्षा का विकास की ऊंची छलांग लगाई है। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा था कि मैं अच्छा वैज्ञानिक इसलिए बन सका, क्योंकि मैने शिक्षा मातृभाषा में प्राप्त की थी। अब वर्तमान में हम शिक्षा के माध्यम के रूप में मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषाओं के उपयोग ध्यान देना प्रारंभ किया है। मातृभाषा में शिक्षा की बात लॉर्ड मैकॉल के समय से ही होती रही है। उस समय यह कहा गया था कि शिक्षा के माध्यम के रूप में जितनी जल्दी हो सके अंग्रेजी को भारतीय भाषा में बदल दिया जाऐं। अब एनईपी 2020 में पुरजोर तरीके से मातृभाषा व क्षेत्रीय भाषाओं में ही शिक्षा को प्राथमिकता देने की बात म.प्र. की शिवराज सरकार ने देश में सबसे पहले म.प्र. में हिन्दी में एम.बी.बी.एस. की पढ़ाई शुरू करने की पहल की। यह ऐतिहासिक कदम माना जाता है कि प्रधानमंत्रीजी के संकल्प को साकार कर यह सिद्ध कर दिया कि म.प्र. अब शिक्षा माध्यम मातृभाषा में होकर इस अवधारणा को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है कि उच्च शिक्षा अंग्रेजी में ही संभव है।
प्रधानमंत्री मोदीजी का मानना है कि एनईपी 2020 को लागू करने से विद्यार्थियों में मातृभाषा में अध्ययन से उच्चतम क्षमता और कौशलता में वृद्धि होगी। उन्होंने कहा भारत के भविष्य को नई दिशा मिलेगी और विश्व में उसकी प्रतिष्ठा बढ़ेगी। यहां यह कह सकते है कि नई शिक्षा नीति में गुणवत्ता, समानता, पहुंच और सामर्थ्य के सिद्धांतो पर तैयार की गई। यह नीति हमारी सरकार के लिए एक मार्गदर्शक के साथ का कार्य भी कर रही है। सरकार के संकल्प को पूरा करने मातृभाषा में पढ़ाई की महत्ता किसी से छिपी नहीं। इसलिए इसका महत्व है कि मातृभाषा में पढ़ने का सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के गरीब वर्ग को, गांव कस्बों में रहने वाले छात्रों, जनजातीय बेटे-बेटियों को मिलेगा। इसके साथ ही मातृभाषा में पढ़ने से उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा उनको सामर्थ्य और प्रतिभा के साथ न्याय होगा। मुख्यमंत्री शिवराजसिंहजी को उम्मीद है कि म.प्र. में चिकित्सा व तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में पहल की अनुगूंज पूरे देश में होगी। हमारा यह प्रयास मातृभाषा की प्रतिष्ठा को स्थापित करेगा और बदलाव लाने में सफल होगा।
अतः यह स्पष्ट है कि इस शिक्षा नीति से हिन्दी माध्यम में पढ़ने वाले विद्यार्थियों का आत्मविश्वास बढ़ाया जा रहा है और उनमें नई ऊर्जा का संचार किया जाएगा।
डॉ. बी.आर. नलवाया
शोध निर्देशक
शासकीय पी.जी. महाविद्यालय, मन्दसौर
मो.नं. 9826769449

jtvbharat
Author: jtvbharat