
बिखरी पड़ी है पुरा संपदा सुरक्षित नही है पाषाण की मूर्तियां
पर्वत सिंह राजपूत
रायसेन/ जिले की तहसील बरेली में जामगढ़ ग्राम ऐतिहासिक एवं पुरातत्व की धरोहर है विन्ध्यांचल पर्वतमाला की तलहटी में स्थित ऋषि मुनियों एवं साधकों की तपस्थली त्रेता, द्वापर दो युगो को साक्षी अपने परिसर में आज भी प्राचीन पौराणिक अवशेष प्राकृतिक सुन्दरता एवं शैलाश्रयों को समेटे गौरवान्वित कर रहा है।शिवशक्ति की क्रीड़ा स्थली विन्ध्यांचल पर्वतमाला पर प्राकृतिक रूप से एक विशाल विस्तृत समतल हरयाली युक्त मनोहारी मैदान के बीचों बीच देवी विन्ध्यवासिनी माँ का बराही स्वरूप अनादीकला से विद्यमान है। यहां नवरात्री में एवं वर्ष भर देवी उपासक आते है। माता रानी के आसपास घनी मनोरम हरियाली युक्त झाड़िया है। मॉ बराही के समीप जामवंत भगवान रीछड़मल के पदचिन्ह एवं अबूझ अकूत खजाने का बीजक ‘शैल चित्र’ है जो आज तक पढ़े नही गये है।
माँ कामाख्या देवी का जादुई मठ
इसी पहाड़ी के बीच एक विशाल जल रहित सरोवर के समीप घनी झाड़ियों के बीच काले विशाल पत्थरों से निर्मित अति प्राचीन सतावटी का पुरातत्वकीय महत्व का मठ मूल स्वरूप में आज मौजूद है। इस में विराजमान देवी कामाख्या रूप में स्थित है पौराणिक कथा के अनुसार यहां देवी….रूप गिरा था जिससे यह स्थान भगदेई से जाना जाता है और भक्तगण इस स्वरूप की पूजा कामाख्या देवी के रूप में होती है। शिवगुफा जामगढ़ के समीप जामवंत गुफा के नीचे माता विन्ध्यवासिनी देवी की तलहटी में विशाल जामवंत सरोवर है यहां पहले वर्षभर पानी रहता था। जिससे ग्रामीणों को व वन्यजीवों को पानी मिलता था। अब सूखा पड़ा है।
सुनाई पड़ती है अलौकिक ध्वनियां वनराज यहां आते है पर्वकाल में माता के दर्शन करने
समाजसेवी कमलकिशोर शर्मा ने बताया कि यहा विशेष अवसर पर मध्यरात्रि के समय अचानक शंख ध्वनियों की अलोकिक ध्वनियां सुनाई देती थी तुरीय संध्याकाल में अलोकिक दिव्य प्रकाश किरणें देवाधिदेव व माता विन्ध्यवासिनी की आरती उतारती दिखाई देती थी। पूर्वजों ने व हमने वनराज को माता विन्ध्यवासिनी के समीप आवाज लगाते सुना है। प्रार्थना करने का क्रम वनराज का था जो आबादी के कारण बंद हो गया है।
कठिन है डगर संरक्षण की दरकार
ऐतिहासिक पुरातत्वीय धार्मिक प्राचीन पर्यटन के महत्व के कारण ग्राम जामगढ़ को शासन द्वारा पर्यटन स्थल घोषित किया गया है, जिसे आज प्रशासनिक संरक्षण की दरकार है। लेकिन सड़क, बिजली, पानी व रख-रखाव की उचित व्यवस्था न होने के कारण श्रध्दालुओं, पर्यटकों व शैलानियों को सुगम मार्ग के अभाव में आवागमन में कठिनाई होती है। भक्तों शैलानियों, पर्यटकों की सुविधा के लिए धर्मशाला, आवागमन के लिये सड़क मार्ग की मांग उठती रही है, जो बेअसर रही। इस सबके बाद भी लोगों की श्रध्दा इन्हें इस चमत्कारी स्थान तक खींच लाती है। ग्राम से जामवंत गुफा शंकर जी गुफा माधामऊ होकर बम्होरी मार्ग से जोड़ा जावे। (2) जामगढ़, बापोली, सेमरी। (3) जामगढ़, हरडोब, आलीवाड़ा, ऊंटिया, सिलवाह। (4) जामगढ़, हमीरगंज तक सड़क मार्ग बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा साथ ही आसपास के ग्रामीण व विद्यार्थीओं को हाईस्कूल, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, पशुचिकित्सालय व साप्ताहिक बाजार आने में सुविधा होगी।