
यात्रियों से मनमानी वसूली
बस स्टाफ करता है यात्रियों से अभद्रता
विशाल बाबा नामदेव
बाग:-नगर से चल रही यात्री बसों में आरटीओ द्वारा सत्यापित किराया सूची नहीं लगी है। निजी बस संचालकों की मनमानी के आगे आम यात्री बेबस हैं। अधिकांश लोगों से किराया देने के बावजूद यात्रियों को अपमानित होना पड़ता है।
बस स्टाफ यात्रियों से अभद्र व्यवहार करते हैं। बेबस यात्री अपमान का घूंट पीकर सफर करने को मजबूर हो रहे हैं। यहां दिव्यांगों और स्कूली विद्यार्थियों को भी रियायत नहीं दी जा रही है। बस मालिकों ने अपनी इच्छा अनुसार किराए में वृद्धि का कर वसूली में लगे हैं। आरटीओ विभाग दावे करता है कि किराया ज्यादा लेने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन अभी तक अधिक किराया वसूली को लेकर जिले में कितनी बसों पर कार्रवाई की गई है, इसका खुलासा नहीं किया है। हैरानी की बात तो यह है कि यहां ना यात्री बस का बीमा , परमिट , फिटनेस चेक किया जा रहा है , ना किराया सूची चस्पा है। अधिकांश बसों में आपातकालीन द्वार , फस्र्ट एड बॉक्स ,स्पीड गवर्नर और फायर किट भी नहीं है। आरटीओ बस संचालकों की मनमानी को रोकने के लिए कोई ठोस कार्रवाई भी नहीं कर रहा है।
यात्रियों से 50 प्रतिशत अधिक किराया वसूली बस संचालकों द्वारा मनमानी वसूली और दोगुने किराए की शिकायत कई बार सामाजिक संगठनों , जनप्रतिनिधियों , जनता द्वारा जिले के आला अधिकारियों को की गई है , लेकिन अधिकारियों की अनदेखी के चलते यात्रियों के साथ अवैध वसूली बंद नहीं हुई है। वर्ष 2016 , 2018 व 2021 में तीन बार किराया बढ़ाया गया है। पहले 10 प्रतिशत फिर 15 प्रतिशत और 2021 में 25 प्रतिशत किराया बढ़ा है, लेकिन यात्रियों से 50 प्रतिशत बढ़ोतरी कर किराया वसूली की जा रही है। जागरूक यात्री यदि ज्यादा किराया लेने की बात कह दें तो यात्रियों को डराया, धमकाया जाता है और गाली गलौज कर बीच रास्ते में ही उतार दिया जाता है। इस तरह यात्रियों की फजीहत हो रही है । दोगुना किराया देने के बावजूद यात्री अपमान का घूंट पीकर यात्रा करने को मजबूर हो रहे हैं।
अधिक किराया वसूली का किया विरोध
ताजा मामला समाने आया जब बाग कि चार अध्ययनरत युवतियां सांराश बस सर्विस मे इन्दौर के लिए सवार हुई तो बस स्टाफ द्वारा मनमाफिक किराया वसुला गया ।नगर के माहेश्वरी समाज कि चारो युवतियां सोमवार सुबह 7:20 पर जोबट से आई बस से प्रस्थान कर इन्दौर के लिए निकली थी तो रास्ते में बस के कंडक्टर द्वारा ढाई सौ रुपए प्रति टिकट के हिसाब से लिया गया। जब कि अंधिकाश बसो में दो सौ रुपये ही लिये जाते हैं । सी ए मे अध्यनरत आशी डांगरा के परिजन दिनेश डांगरा ने फोन पर चर्चा कर सफर की कुशलता जानने लिए फोन पर चर्चा की तब इस बात का पता लगा कि बस कंडक्टर द्वारा अधिक किराया वसूल किया गया है ।आशी के पिता दिनेश डांगरा ने चर्चा में बताया कि 2 दिन पूर्व परी अमित मान्धनीया द्वारा द्वारा सारांश बस सर्विस के स्टाफ को फोन कर कर सीट बुक कराई गई थी । बस कंडक्टर ने सीट नंबर 17, 18 ,19, 20 प्रदान कि गई ।सोमवार सुबह बस में सवार होकर निकली तो टांडा के पास बस कंडक्टर द्वारा अधिक किराया वसूल करने की बात बताई।जिसे लेकर मेरे द्वारा बस कंडक्टर का व्यवहार और अधिक किराया के संबंध में बात कि गई तो उल्टा वही मुझे ज्ञान देकर किराये के बारे मे बोलने लग गया ।काफी विरोध करने के बाद मेरे द्वारा परिवहन विभाग से पारित आरटीओ द्वारा जारी किराया सूची की मांग की गई। तो मुकर गया और फोन बंद कर लिया ।तब मैने बिटिया के फोन पर जब मेरे द्वारा इस संबंध में पुलिस में आवेदन देकर प्रकरण दर्ज करने की बात कही तब जाकर उसने पैसे लौटाए ।युवती के पिता जागरूक होने के नाते इस तरह की मनमानी से बच गये । परंतु बस संचालकों को द्वारा किसी भी यात्रियों के साथ इस तरह की घटना अक्सर होती रहती है जिसका विरोध नहीं करने के कारण ही इनके मन सुबे और हौसले बड़े हुए हैं ।
नियम यह कहते हैं
मध्य प्रदेश में 20 अप्रैल 2021 को 25% किराया बढ़ोतरी के साथ गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया था। जिसमें पहले 5 किलोमीटर के साथ रुपए एवं उसके बाद प्रति किलोमीटर 1 रुपए 25 पैसे के हिसाब से किराया तय किया गया है, लेकिन जिले कि यात्री बसों में इससे उलट दोगना किराया वसूला जा रहा है। यात्री बस में 15 किलोमीटर की यात्रा करने वाले से भी 30 रुपए किराया वसूला जा रहा है। इसमें आरटीओ व बस संचालकों की मिलीभगत का आरोप की भी चर्चा हैं ,वही इसे जिले में पदस्थ प्रशासनिक अधिकारियों की निष्क्रियता भी कहा जा सकता है। मोटर व्हीकल एक्ट के अनुसार परिवहन विभाग द्वारा सत्यापित किराया सूची हर बस पर होना जरूरी है और इस सूची के आधार पर ही यात्रियों से किराया ली जा सकती है, लेकिन बाग से चल रही अंधिकांश बसों में इन नियमों की अनदेखी की जा रही है , विकलांग महिलाओं की आरक्षित सीटों पर भी उन्हें बैठने की जगह नहीं दी जाती। बस में यात्रियों से हुए विवाद को नियंत्रित करने के लिए बस मालिकों व बस स्टाफ द्वारा अकसर यात्रियों से दुव्र्यवहार की शिकायतें मिलती हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा कोई ध्यान नहीं दिया जाता।