
राजेश नाहर ,खेतिया ,,,
खेतिया शहर का पहला अग्नि वीर सैनिक प्रफुल्ल पाटिल अपना कठिन प्रशिक्षण पूरा कर शहर लोटे ,21 वर्षीय प्रफुल्ल पाटिल को खेतिया शहर पहुंचने पर महारास्ट्र सीमा के श्री हनुमान जी मंदिर पर बड़ी संख्या में नागरिकों ने एकत्रित होकर उसकी आगवानी की,,माता व साथ आई महिलाओं ने आरती कर तिलक किया,नागरिकों ने पुष्प हार से स्वागत करते हुए ढोल ताशा के साथ खेतिया शहर में प्रवेश कराया ।उत्साहित युवाओं ने उसे अपने कंधो पर बैठाया,,भारत माता की जय के नारे लगाए। प्रफुल्ल खेतिया के पहले अग्नि वीर हैं उनके पिता रविंद्र पाटील एक वाहन चालक है जो सदैव मंचों पर राष्ट्रभक्ति के गीत गा गाकर लोगों को भी राष्ट्र प्रेम की प्रेरणा देते रहे हैं,,अग्निवीर प्रफुल्ल परिवार में तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं जिन्होंने अपने प्रयास के साथ अग्नि वीर में चयन होने में सफलता हासिल की। एक अच्छे खिलाड़ी होने के साथ सदैव देशभक्ति को लेकर लोगों को प्रेरित करने वाले प्रफुल्ल के स्वागत के साथ ही पिता व माता अपने बेटे को देखकर खुशी से भावुक हो गए ।घर पहुंचने पर गली के लोगो ने आरती उतार कर आशीर्वाद दिया,,घर के द्वार पर माता पिता व दादा दादी को सलामी देकर अपने घर मे प्रवेश किया।शहर में निकले जुलूस के बाद प्रफुल्ल ने हमारे संवाददाताओं से बात करते हुए बताया कि मेने बी एस सी की पढ़ाई के साथ एनसीसी का बी सर्टिफिकेट प्राप्त किया,,सेना में जाना मेरा लक्ष्य रखा व उसे पाने के लिये कड़ी मेहनत की।शारीरिक योग्यता के साथ मेरे चयन के बाद हैदराबाद में सेना के मैदान पर सेना द्वारा मेरी ट्रेनिंग पूरी हुई है बहुत कुछ सीखा,,और अब मैं अपनी कुछ दिनों के अवकाश के बाद अपने पद स्थापना पर जा रहा हूं देश के लिए काम करना बहुत अच्छी बात है और मैं सभी से अनुरोध करता हूं कि बच्चे देश सेवा के लिए अपने से जो बन पड़े वह जरूर करें ।प्रफुल्ल के पिता रविन्द्र अपने बेटे की सफलता से प्रसन्न है,,ख़ुशी से भावुक हो बताते हैं कि मेरे तीनो बच्चों ने भी प्रयास किया किंतु सफलता सबसे छोटे को मिली बेटे की सफलता से मैं खुद प्रसन्न हूं उन्होंने संवाददाताओं के समक्ष एक राष्ट्र भक्ति की पंक्तियां है प्रीत जहां की रीत सदा,, गाकर सभी को राष्ट्र प्रेम के लिए प्रेरित किया खेतिया जैसे शहर का यह प्रथम अग्नि वीर है जिसने सफलतापूर्वक अपने ट्रेनिंग पूरी की कड़ी मेहनत के साथ भारतीय सेना के ही अग्निवीर को शहर के लोगों ने हाथों-हाथ लेकर उसे मालाओं से स्वागत करते हुए उन्हें अपने निवास पहुंचाया।