
गुरु को वंदन करने से जीवन के बंधन टूटते है..संत श्री
विशाल बाबा नामदेव
बाग: – आचार्य श्री ऋषभचंद्र सूरी जी के शिष्यरत्न पीयूषचन्द्र विजय जी व रजतचंद्र विजय जी महाराज साहब का यहां शुभआगमन हुआ। जैन श्रीसंघ बाग, म.सा. की, बाघनी नदी के समीप अगवानी करने पहुंचा।
ढोल- ढमाके के साथ उत्साह से नगर भ्रमण कर विमलनाथ जैन मंदिर पहुंचा व प्रभु का सामुहिक चेत्यवंदन किया।
पश्चात पुण्यसम्राट हाल में प्रवचन में बताया की संतो व बसंत के आगमन से इंसान एवं प्रकृति मै पुण्य – हर्ष – प्रसन्नता छा जाती है।
जीवन को संतो के सानिध्य में एवं बसंत की तरह खुशी से गुजारो।
दुनिया में हर व्यक्ति के जीवन में कुछ न कुछ समस्या है।
मन का भाव (भावना) सही हो तो वर्तमान भव सुधरता हैं।
कोई भी व्यक्ति मुरझा हुआ फूल नहीं चाहता सभी खिला हुआ फुल चाहते है।
संघ-समाज चाहे छोटी संख्या में हो मन उदार-विराट होना चाहिए।
गुरु के पास हमेशा चिंतामुक्त एवं खुश होकर जाना चाहिए।
मुनिश्री ने बताया कि जब जीवन का अंत हो , मुख का नाम अरिहंत हो , सामने कोई संत हो व वर्धमान महावीर स्वामी का पंथ हो।
गुरु को वंदन करने से जीवन के बंधन टूटते है। आपश्री ने बताया की मुंबई के जिला पालघर के दहाणु (घोलवड़) से श्री राजेन्द्रसूरी तीर्थ धाम में गुरुसप्तमी कार्यक्रम संपन्न कर अभी निसरपुर (कुक्षी) में जैनों के २२वें तीर्थंकर यदुवंशी श्री नेमनाथ – राजुल मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा संपन्न कर यहां विहार किया। समाज के अरविंद जैन ने बताया की बाग श्री संघ के अध्यक्ष
अमित जैन , राहुल जैन , प्रफुल्ल जैन , निलेश जैन , नवीन जैन , निर्मल जैन , सोमेश जैन , विहार परिषद के चिंतन जैन , संयम जैन , प्रिंस जैन , आदि उपस्थित थे।