
ग्राम निसरपुर को भी शराब बंदी सूची में शामिल किया जाए
संत समाज , कोटितीर्थ (कोटेश्वर) नर्मदा से एक किलोमीटर से भी कम दूरी में सैकड़ों मंदिरों के बीच निसररपुर की शराब दुकान से साधु संत महात्मा परेशान
संघर्ष से सिद्धि की खास खबर
बड़वानी अलीराजपुर धार और झाबुआ चारों जिलों के लाखो हिंदू समाज ओर श्रद्धालुओं की आस्था इस कोटेश्वर तीर्थ स्थल से अतिप्राचीन काल से जुड़ी हुई है यहा अंतिम संस्कार ,अर्पण तर्पण और स्नान के लिए लाखों समाजजन कोटेश्वर धाम पर आते है। यहां पर दशा का कार्यक्रम हो या मुंडन का या अंतिम संस्कार हो कर्मकाण्ड के लिए इस क्षेत्र में यह एक मात्र स्थान है।
सरदार सरोवर बांध से पुराने कोटेश्वर डूब क्षेत्र में आने से कोटेश्वर ओर निसरपुर को पास में ही व्यवस्थापित किया गया है। नए निसरपुर ग्राम में शासन की ओर से नया घाट (नए पुल के पास में) स्वीकृत हो चुका है और पुराने कोटेश्वर से कई मंदिर निसरपुर में शिफ्ट हो चुके हैं उनका भी जीर्णोद्धार किया जा चुका है ।
लाखों लोगों की आस्था का केंद्र, रामायण और महाभारत कालीन यह दिव्य स्थान, जहां पर रावण और मेघनाथ ने आकर तपस्या की है, यह क्षेत्र संतो की तप स्थली है वालिपुर के श्री श्री १००८ गजानंद जी महाराज, कोटेश्वर के श्री श्री१००८ कमल दास जी महाराज, धरम राय के श्री श्री १००८ बाल ब्रह्मचारी ईश्वर दत्त जी महाराज, खेड़ा के श्री श्री 1008 हरिहर फलाहारी बाबा जिन्होंने अपने शरीर छोड़ने के पहले ही भक्तों को दो माह पहले बता दिया था कि रामनवमी के दिन इस शरीर का में त्याग कर दूंगा अतः इनकी समाधि खेड़ा में स शरीर बना दी गई ऐसे महान तपस्वी संतों का यह प्राचीनतम स्थल मां नर्मदा के किनारे बसा हुआ था।
कोटेश्वर तीर्थ की महिमा वेदों नर्मदा पुराणों और संतों के द्वारा हमेशा से बताई जा रही है कोटेश्वर तीर्थ डूब क्षेत्र में आने के कारण उसकी बसावट निसरपुर ग्राम में शासन के द्वारा की गई है।
कोटेश्वर तीर्थ के अनेक मंदिर की मूर्तियों को वहां से ला करके नसीरपुर ग्राम में स्थापित किया गया है और उन मंदिरों का जीर्णोद्धार किया गया है कोटेश्वर तीर्थ में कमल दास जी महाराज की समाधि स्थल, गौशाला, आश्रम को भी नई निसरपुर में पुनः स्थापित किया गया है। आश्रम के पीछे ही भाव तट स्थल बनाने के लिए शासन के द्वारा स्वीकृति प्राप्त हो गई है। भक्तों के लिए यहां पर बहुत जल्दी ही स्नान और कर्मकांड के लिए निसरपुर में नर्मदा के किनारे जीर्णोद्धार शासन के द्वारा किया जा रहा है ।
यह संतों की भूमि है, यह कहीं दिव्या संतों की तपस्यास्थली है। यहां अनेक संतों ने धर्म को बचाने के लिए, धर्म की स्थापना के लिए, हमेशा अपना पूरा जीवन अर्पण किया है और आज भी अनेक संत यहां पर बालीपुर के योगेश जी महाराज, सुधाकर जी महाराज और कोटेश्वर के कमल दास जी महाराज के कृपा पात्र अयोध्या दास जी महाराज निरंतर गौ सेवा, संत सेवा, और दीन दुखियों का दुख करने के लिए संत वचन और अपनी कृपा दृष्टि से पूरे क्षेत्र का उद्धार कर रहे हैं निवासरत है।
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जब नर्मदा परिक्रमा पर आए थे तब कोटेश्वर वाले गुरुदेव अयोध्या दास जी महाराज को वचन दिया था और वादा भी किया था और सभी भक्तों के सामने कहा था की निसरपुर पर नर्मदा के तट से मास मदिरा की दुकान नर्मदा तट से 5 किलोमीटर दूर तक नहीं रहेगी ,अभी वर्तमान में नर्मदा से मात्र 1 किलोमीटर दूर नर्मदा का घाट निसरपुर में ही शासन के द्वारा स्वीकृत कर दिया गया है और सारे मंदिर भी यहां बना दिए गए हैं,वही पुराने कोटेश्वर से सारे आश्रम भी यहां पर स्थापित किया जा रहे हैं और कुछ हो भी गए हैं सारे कार्य प्रगति पर है। अतः यह शराब दुकान इस श्रेत्र से हमेशा के लिए हटाना चाहिए,नसीरपुर नर्मदा का तट भी शराब और मास के विक्रय से मुक्त होना चाहिए।
- अतः हमारा यह प्रदेश के मुखिया डॉ मोहन यादव से ओर शासन प्रशासन के संज्ञान में पूर्व मुख्यमंत्री श्री चौहान का साधु संतों से किया वादा याद दिलाते हुए नर्मदा से एक किलोमीटर से कम दूरी पर नई नसीरपुर ग्राम में अनेक मंदिरों, धर्मस्थल, अनेक संतों की तप स्थली ,आश्रम, कोटेश्वर तीर्थ स्थल नर्मदा का किनारा ,होने के कारण और शासन के द्वारा यहां पर लाखों रुपए खर्च कर नर्मदा का घाट नए पुल के पास में बनाने के कारण और नर्मदा परिक्रमा वासियों का यहां पर निरंतर आने रहने और ठहरने के कारण यह पवित्र और धार्मिक तीर्थ स्थल की गिनती में आता है और सरकार के रिकॉर्ड में भी दर्ज है। इसको भी प्रदेश की 17 शराब दुकाने जो धार्मिक स्थल होने पर प्रचलित थी को वर्ष 2025- 26 से प्रदेश के मुखिया ने शराब से मुक्त कर नई शराब नीति में भी शामिल किया और गजट प्रकाशित किया है उसमें नर्मदा नदी के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल कोटेश्वर के नजदीक होने से ग्राम निसरपुर की भी शराब दुकान के साथ ही मांस दुकानों को प्रतिबंधित किया जाकर लाखो श्रद्धालुओं की जन भावना ओर नर्मदा नदी किनारे कोटेश्वर तीर्थ स्थल पर विराजित साधु संतों की भावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए ओर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के किए गए वादे को पूरा करने के लिए उचित कदम उठाते हुए ग्राम निसरपुर की शराब ओर मांस की दुकानो को हटाने का आदेश प्रसारित कर सनातन धर्म के हितों की रक्षा करे।