उदयपुरा मेंं प्रभातफेरी की वर्षों पुरानी परंपरा पुनर्जीवित

पर्वत सिंह राजपूत

रायसेन जिले का उदयपुरा नगर पुण्यसलिला मां नर्मदा के आंचल मेंं बसा हुआ है क्योंकि उदयपुरा नगर के चारों ओर नर्मदा जी के तट स्थित हैं…. यही कारण है कि इस सौभाग्यशाली नगर में धार्मिक. कार्य होते रहते हैं….. इस नगर में पिछले लगभग पचास साठ वर्षों से प्रातःकालीन प्रभातफेरी निकाली जाती थी.बीच के कुछ वर्षो.से यह परंपरा किन्हीं कारणों से अवरुद्ध हो गई थी…. लेकिन पिछले साल अयोध्या में श्री राम मंदिर मेंं रामलला. की मूर्ति स्थापना दिवस के.ऐतिहासिक दिन से फिर से नगर में प्रभातफेरी निकाली जाती है…. प्रारंभिक दौर मेंं प्रभातफेरी छतवाले कुएँ.चौराहे पर स्थित प्राचीन पीपल वृक्ष के पास से शुरू होकर नगर परिक्रमा कर फिर इसी स्थान पर समाप्त होती थी…फिर कुछ सालों तक हनुमान मंदिर तलापुरा से यह प्रभातफेरी शुरू होकर नगर भ्रमण कर यहीं पर समाप्त होती रही. फिर इस परंपरा को नगर के एक वयोवृद्ध भक्त जसमन सिंह विश्वकर्मा ने अकेले ही अनेक वर्षों तक चलाया… लेकिन जसमन विश्वकर्मा जी के निधन के बाद प्रभातफेरी की परंपरा बीचबीच मेंं अल्प अवधि के लिए ही चलकर अवरुद्ध होती रहती थी.खुशी की बात है कि पिछले साल जनवरी 2024से शुरू हुई प्रभातफेरी रोजाना नियमित रूप से निकाली जा रही है. वर्तमान में प्रभातफेरी नगर सब्जी मंडी के हनुमान मंदिर से प्रारंभ होकर …वहां से गल्ला बाजार, कालका मंदिर,श्री रामजानकी बडा मंदिर, खेरापति माता मंंदिर,हनुमान मंदिर तलापुरा मार्ग से होते हुए भैरव मंंदिर, सुक्का दादा राम मंंदिर.. छोटे मंंदिर, मुख्यबाजार, गांधी चबूतरा होती हुई अंंत मेंं फिर से सब्जी मंडी स्थित हनुमान मंदिर पर प्रसाद वितरण के साथ समाप्त की जाती है प्रभातफेरी मेंं “सीताराम.. सीताराम नाम का संकीर्तन साजबाज.. के साथ होता है…. सीताराम नाम संकीर्तन से नगर को वायुमंडलीय प्रदूषण से मुक्ति मिल रही है…रामचरित मानस की यह सारगर्भित चौपाई”कलजुग केवल नाम अधारा सुमिर सुमिर नर उतरहिं पारा”इस प्रभातफेरी की परंपरा की सार्थकता को प्रमाणित और पुष्ट करने के लिए पर्याप्त है

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Author: jtvbharat