
राजेश नाहर
खेतिया,,,,
गर्मी के मौसम की शुरूआत के साथ खेतों में पक कर खड़ी फसलों की कटाई भी शुरू हो गयी है। जिसमें मुख्यतौर पर गेहूं, चना आदि फसल शामिल है। जोकि गर्मी के सीजन में ही पकती हैं और उनकी कटाई भी गर्मी की शुरुआत से ही शुरू होती है।
खेतिया व इसके आसपास ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा गेहूं की फसल को बोया जाता है। लगभग सभी क्षेत्रों में गेहूं की फसलें धीरे-धीरे पकने लगी हैं और कई जगहों पर तो उनकी कटाई भी शुरू हो चुकी है। जिससे अब खेतों में हार्वेस्टर और ट्रैक्टर आदि कृषक के वाहन फसलों की कटाई करते हुए नजर आ रहे हैं।
फ़सल कटाई के लिए हारवेस्टर पंजाब से यहां आते हैं।वर्तमान समय मे खेती कार्य हेतु मजदुरों की दिक्कत है जिसके चलते
अधिकतर अब हार्वेस्टर से ही सभी फसलों की कटाई की जाती है। जिसमें किसानों का समय भी बचता है और पूर्ण रूप से पूरी फसल की कटाई भी हो जाती है। अधिकांश हार्वेस्टर पंजाब से ही शहर में आते हैं,जो की फसलों की कटाई करते हैं। क्योंकि हार्वेस्टर जैसी आधुनिक वाहन का उपयोग हमारे शहर के अधिकतर किसानों को नहीं आता है, जिसके चलते किसान इनके द्वारा ही अपनी फ़सल कटवाते है। ऐसे वाहन और इनको चलाने की तकनीक भी पंजाब के किसानों में होती है। जहां से बड़ी संख्या में पंजाबी लोग शहर आते हैं और जिले में जगह-जगह जाकर गेहूं की फसलों की कटाई करते हैं।
किसानों का कहना है कि पंजाब से आने पर प्रति एकड़ कटाई महंगी होने लगी।
फसलों की हार्वेस्टर द्वारा कटाई के लिए पहले 1000 रूपए प्रति एकड़ लगा करता था। परंतु इस वर्ष से इनके रेट भी बढ़ गए हैं। जिसमें अब हार्वेस्टर द्वारा कटाई कराने पर किसानों को 1800 से लेकर 2000 रुपए प्रति एकड़ पर देने पड़ रहे हैं। जिसके चलते फसलों को कटाई अब महंगी हो गई है। फसलों की बढ़ती लागत से चिंतित किसानों ने गेहूं कटाई में आने वाले खर्चे को लेकर प्रशासन व अधिकारियों से इस सम्बंध में करने की बात कहि है।शासन को अपने स्तर पर कम खर्च में कटाई हेतु सुविधा दिलाने का भी अनुरोध किसानों ने किया है