आकर्षक गणगौर नृत्य देखने उमड़े हजारों श्रद्धालु।

गणगौर पर्व: कुक्षी में गणगौर नृत्य ने सबका मन मोहा, नम आंखों से दी मां को बिदाई।
नरेश राठौड़
कुक्षी:- मालवा निमाड़ के सबसे प्रमुख त्यौहार गणगौर महोत्सव के दौरान गुरुवार शाम को शहर के कचहरी चौक में सीरवी समाज के 200 गणगौर माता के रथों का सामूहिक नृत्य किया गया। क्षत्रिय सिर्वी समाज द्वारा विशेष एवं मनमोहक रूप से श्रृंगारित 200 गणगौर माता के रथों का चल समारोह श्री आई माताजी मंदिर से शुरू होकर प्रमुख मार्ग सराफा बाजार,बड़ी हताई होते हुए कचहरी चौक पहुंचा।जहां एक साथ महिलाएं अपने सिर पर गणगौर रथों को रखकर क्षेत्र का प्रसिद्ध गणगौर नृत्य किया। यहां लोक संस्कृति की अनुपम छटा दिखाई दी। अंचल के कई गांव से हजारों श्रद्धालु इस नृत्य को देखने एकत्रित हुए।चौक के साथ आसपास के भवन श्रद्धालुओं की भीड़ से खचाखच भरे हुए थे।राजस्थानी वेशभूषा में श्रृंगारित रथ मनोहारी दिख रहे थे।
निमाड़ के पारंपरिक लोक पर्व गणगौर की नगर में विशेष घूम रही। शहर में निवासरत सभी समाज वर्गों ने आस्था के साथ इस पर्व को श्रद्धा पूर्वक मनाया। सिर्वी समाज द्वारा इस पर्व के अंतिम दिन सिर्वी समाज के नेनकी हताई में पारंपरिक डांडिया नृत्य किया गया।तथा रथों का रात्रि विश्राम हुआ।पूरी रात कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।मटकी नृत्य, ताली सु ओर गजल नृत्य ने भी सबका मन मोहा।

गणगौर महोत्सव के दौरान किसान अपने दैनिक कृषि कार्य को पूर्ण कर आस्था के इस पर्व में श्रद्धा भाव से डूबे रहे। रात्रि में सीरवी समाज द्वारा श्री आई माता मंदिर, बड़ी हताई और नेनकी हताई में पारंपरिक झलारिया एवं रतजगा किया गया।गुरुवार को सभी घरों से ज्वारों का पूजन अर्चन कर माधव श्री प्रसादम लाया गया यह से एकसाथ ज्वारों को नर्मदा तट स्थित राजघाट विसर्जन किया गया।गणगौर महोत्सव को देखने के लिए कुक्षी तहसील के विभिन्न ग्रामों के लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा।

ये रहे उपस्थित
गणगौर पर्व देखने प्रदेश भाजपा मंत्री जयदीप पटेल,धार भाजपा ग्रामीण जिलाध्यक्ष चंचल पाटीदार,भाजपा नेता व पार्षद संजय सीरवी,ज्योति धर्मेंद्र काग,पूर्व पार्षद, क्षत्रीय सीरवी समाज अध्यक्ष कांतिलाल गेहलोत, उपाध्यक्ष कैलाश काग, कोषाध्यक्ष राजेश भायल,कोठारी मोतीलाल काग, वरिष्ट पंच राजेश राठौर कोटवाल रमेश परिहार पूर्व सकल पंच समिति,समाज के वरिष्ठजन,पूर्व अध्यक्ष के साथ नगर पंचायत एव पुलिस प्रशासन का सहयोग रहा।

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Author: jtvbharat