
जनपद सीईओ दीक्षित और एपीओ भरत सिंह ने संभाली कमान, कुछ पंचायत सचिवों की लापरवाही आई सामने
ब्यूरो चीफ राकेश सिंह बैतूल
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बैतूल :- विकासखंड आठनेर में आज 16 मई को एक भव्य और ऐतिहासिक सामूहिक विवाह सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 200 जोड़े पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ वैवाहिक बंधन में बंधेंगे। यह आयोजन मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत किया जा रहा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को न सिर्फ सामाजिक सहारा मिलेगा बल्कि सशक्त शुरुआत का अवसर भी प्राप्त होगा।
इस आयोजन की पूरी जिम्मेदारी जनपद पंचायत आठनेर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी देवेंद्र दीक्षित और एपीओ भरत सिंह ने स्वयं संभाली। दोनों अधिकारी बीती रात तक विवाह स्थल पर डटे रहे और तैयारियों की एक-एक बारीकी का जायजा लिया। दूल्हा-दुल्हन की बैठने की व्यवस्था हो या विवाह मंडप, भोजन व्यवस्था हो या मंच सज्जा—हर पहलू पर नजर रखी गई।जब अधिकांश मौकों पर अधिकारी केवल औपचारिकता निभाते नजर आते हैं, तब आठनेर में दीक्षित और सिंह ने सक्रियता की मिसाल पेश की। वे केवल मंच पर नहीं, बल्कि मैदान में व्यवस्था सुधारते और कर्मचारियों का मार्गदर्शन करते दिखाई दिए।सभी धर्मों के जोड़ों की शादी उनके परंपरागत रीति-रिवाजों से कराई जा रही है। यह आयोजन सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन गया है, जिसमें हर वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई।इस योजना के अंतर्गत योग्य कन्याओं को 55 हजार रुपये की सहायता दी जाती है, जिसमें 49 हजार रुपये का चेक सीधे कन्या के नाम होता है और 6 हजार रुपये आयोजन खर्च के लिए। इस योजना का उद्देश्य बेटियों को आत्मनिर्भर बनाना है और इसका संचालन सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग करता है।
कुछ पंचायत सचिवों की बेरुखी बनी परेशानी का कारण
जहां एक ओर वरिष्ठ अधिकारी आयोजन को सफल बनाने में पूरी ताकत झोंक रहे हैं, वहीं कुछ ग्राम पंचायतों के सचिव इस प्रयास में बाधा बनते नजर आए। सम्मेलन स्थल पर पानी की व्यवस्था के लिए टैंकर बुलवाए गए थे, लेकिन कुछ सचिवों ने टैंकरों की मरम्मत की जिम्मेदारी से किनारा कर लिया। खबर लिखे जाने तक कई फूटे टैंकर स्थल पर खड़े थे, जिनसे सम्मेलन शुरू होने से पहले ही पानी खत्म हो जाने की आशंका जताई गई।जब इस लापरवाही की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई तो उन्होंने तुरंत कार्रवाई करते हुए संबंधित टैंकरों को हटवाया गया।यह घटना बताती है कि यदि सभी विभाग एकजुटता से कार्य करें तो किसी भी आयोजन को भव्यता दी जा सकती है, लेकिन लापरवाह तत्वों पर सख्त कार्रवाई भी आवश्यक है।
सामूहिक विवाह सम्मेलन सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाला उत्सव बन गया है, जिसमें भावनाएं, परंपराएं और सामाजिक जिम्मेदारी- सब मिलकर एक सुंदर तस्वीर गढ़ते हैं।