“सार्थक लेखन कर शब्द को नया संस्कार दें”।

श्री मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति में प्रति शुक्रवार को आयोजित होने वाले “सृजन विविधा” के प्रथम सत्र में “सार्थक लेखन” पर चर्चा करते हुए कार्यक्रम की संयोजक साहित्य मंत्री डॉ.पद्मा सिंह ने कहा कि” लेखक ईश्वर प्रकृति और मानवीय संवेगों के बीच रागात्मक सम्बंध जोड़ता है।सफल लेखन वह होता है, जिसमें समय की धड़कन शामिल होती है”। दूसरे सत्र में आमंत्रित रचनाकारों ने रचनापाठ किया।आनंद पचौरी ने “जब सपने छिपा रहे हों गर्म आँसू तब मौन हो जाना”कविता पढ़ी। दिनेश तिवारी उपवन ने “समय अपने आप में बादशाह होता है, समय बड़ा बलवान” कविता पढ़ी, निरुपमा,शीला चंदन, तृप्ति शाह, किशोरयादव और ज्योति यादव ने भी भावपूर्ण कविताएँ पढीं।सुरेखा सीसौदिया ने “बहते रहेंगे कलकल अनंत से अनंतकी ओर”,राधिका इंगले ने “ख्वाबों का शहजादा, दहकता अँगारा”, अनिल ओझा ने परिवर्तन कविता पढ़ी। दिलीप नीमा ने व्यंग्य “खांसी और नफे की बात, मदनलाल, जयंत तिकोटकर, जितेंद्र मानव मनीष दवे, संजय तराणेकर ने भी वर्तमान समय और मानवीय संवेदनाओं पर रचना पाठ किया।इस अवसर पर अनिल भोजे, राजेश शर्मा व अनेक सुधिजन उपस्थित रहे।हाल ही में नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त हुए समिति के सम्मानित ट्रस्टी डॉ.सचिन चतुर्वेदी को मिले सम्मान की सभी को सूचना दी गई जिस पर सभी ने करतल ध्वनि से हर्ष व्यक्त किया।
अंत में सभी का काव्य मय आभार परीक्षा मंत्री.प्रो. उमेश पारिख ने माना।

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Author: jtvbharat