
कृषि विभाग की “दिखावे की” कार्रवाई पर सवाल।
कल्पेश सोनी ( राजू )-9977226352
खरगोन जिले में बीज के बाद अब खाद के काले कारोबार का बड़ा खुलासा हुआ है. खरगोन के पास मेनगांव में थाने के करीब कृषि विभाग की नाक के नीचे बिना किसी अनुमति के “जैविक” के नाम पर धड़ल्ले से कम्पोस्ट खाद का निर्माण और खुलेआम बेचान किया जा रहा था.। इस मामले में कृषि विभाग द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जिसे कई लोग केवल “दिखावे की” कार्रवाई बता रहे हैं। जिला मुख्यालय से 10 किमी दूर मेनगांव में खेत में नकली खाद की आशंका में खरगोन एसडीएम ओर कृषि विभाग की टीम ने जांच की है। इसमें 600 बोरी पैक और 50 बोरी खुला खाद मिला है। कृषि विभाग के बीएल भंवर कहना है कि मुंबई की एबीसी नामक कंपनी का खाद है। लकड़ी और मक्का जलाकर खाद बनाया जा रहा था। बिना अनुमति के खाद बनाई जा रही हैं। इसके मैनेजर रोहित मालवीया बीस्तन है। मौके पर तहसीलदार महेंद्र दांगी,आरआई विजय सुनहरे व पटवारी वीरेंद्र जोशी शामिल रहे। कृषि विभाग के बी एल भंवर ने बताया कि कुछ तथाकथित व्यापारी जैविक खाद के नाम पर किसानों को ठग रहे थे.ये लोग बिना किसी गुणवत्ता नियंत्रण या सरकारी अनुमति के कम्पोस्ट खाद तैयार कर उसे ऊंचे दामों पर बेच रहे थे। किसानों को यह कहकर गुमराह किया जा रहा था कि यह खाद उनकी फसलों के लिए अत्यंत लाभकारी है और पैदावार बढ़ाएगी.।
कृषि विभाग पर उठते सवाल
इस अवैध कारोबार की जानकारी मिलने पर कृषि विभाग ओर एसडीएम ने सयुक्त रूप से मेनगांव में छापेमारी की गई और 600 बोरी पैक ओर 50 बोरी खुला खाद जब्त की गई । हालांकि, स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि यह कार्रवाई मात्र औपचारिकता थी. उनका आरोप है कि कृषि विभाग को इस अवैध धंधे की जानकारी काफी समय से थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
किसानों की परेशानी
किसानों का कहना है कि उन्हें इस तरह की धोखाधड़ी से भारी नुकसान हो रहा है. वे अच्छी पैदावार की उम्मीद में महंगी खाद खरीदते हैं। लेकिन उसका कोई फायदा नहीं मिलता। इससे न केवल उनका पैसा बर्बाद होता है, बल्कि उनकी फसलों को भी नुकसान होता है।
आगे क्या?
यह देखना होगा कि कृषि विभाग इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है. क्या सिर्फ कुछ नमूनों की जब्ती तक ही बात रहेगी, या फिर इस काले कारोबार में शामिल बड़े मगरमच्छों पर भी शिकंजा कसा जाएगा? किसानों और आम जनता की मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए.